Hemant Soren government controversy

“मरांडी का वार: वोटबैंक के लिए 3 लाख मुआवजा, श्रद्धालुओं की मौत पर भेदभाव”

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हेमंत सरकार पर बाबूलाल मरांडी का गंभीर आरोप: तुष्टीकरण के लिए 3 लाख, कांवरियों की मौत पर सिर्फ 1 लाख मुआवजा

मुख्य बिंदु:

  • आफताब अंसारी की मौत पर राज्य सरकार ने 3 लाख मुआवजा घोषित किया

  • पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण डूबना बताया गया, न कि मॉब लिंचिंग

  • स्वास्थ्य मंत्री की भूमिका और मंशा पर सवाल

  • कांवरियों की मौत पर केवल 1 लाख रुपये मुआवजा

  • बाबूलाल मरांडी ने सरकार पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया



तुष्टीकरण की पराकाष्ठा: आफताब को 3 लाख, कांवरियों को सिर्फ 1 लाख

रांची, 29 जुलाई 2025- भाजपा नेता और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन सरकार पर बड़ा हमला बोलते हुए कहा है कि यह सरकार तुष्टीकरण की राजनीति में पूरी तरह डूबी हुई है। उन्होंने सवाल उठाया कि एक समुदाय विशेष के व्यक्ति की मौत पर जहां सरकार 3 लाख रुपये का मुआवजा देती है, वहीं भगवान शिव के भक्त कांवरियों की मौत पर महज 1 लाख रुपये की राशि घोषित की जाती है।

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रामगढ़ के आफताब की मौत पर बना ‘मॉब लिंचिंग’ का झूठा मुद्दा?

रामगढ़ में हाल ही में आफताब अंसारी नामक व्यक्ति की मौत के बाद राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने बयान दिया कि यह मॉब लिंचिंग का मामला है और उसके परिजनों को 3 लाख रुपये का मुआवजा देने की घोषणा की।

हालांकि अब इस मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, आफताब की मौत पानी में डूबने से हुई थी, न कि किसी भीड़ की हिंसा से। इसके बाद मरांडी ने तीखा तंज कसते हुए कहा कि “अब तो मंत्री जी की डिग्री भी संदेह के घेरे में आ गई है।”

वोटबैंक की राजनीति के लिए सरकारी खजाना लुटाया जा रहा: मरांडी

बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि सरकार केवल वोटबैंक को खुश करने के लिए ताबड़तोड़ घोषणाएं कर रही है, भले ही सच्चाई कुछ और हो। उन्होंने कहा कि मंत्री ने सच्चाई की परवाह किए बिना केवल तुष्टीकरण के लिए 3 लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा कर दी, जो कि राज्य की नीति और संवैधानिक जिम्मेदारी के खिलाफ है।

कांवरियों की मौत को मिला दोयम दर्जा?

मरांडी ने बताया कि दूसरी ओर बाबा बैजनाथधाम की पूजा कर लौट रहे कांवरियों की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई, लेकिन राज्य सरकार ने केवल 1 लाख रुपये मुआवजा देने की बात कही।

उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इस सरकार की नजर में एक शिव भक्त कांवरिये की जान की कीमत सिर्फ 1 लाख है, जबकि बिना पुष्टि के मौत को मॉब लिंचिंग बता 3 लाख का मुआवजा देना तुष्टीकरण नहीं तो और क्या है?

सरकार की नीति पर खड़े हुए बड़े सवाल

इस पूरे प्रकरण को लेकर झारखंड की जनता में आक्रोश है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या सरकार की नजर में कुछ लोगों की जान की कीमत ज्यादा है और कुछ की कम?

बाबूलाल मरांडी ने इस दोहरी नीति की आलोचना करते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है कि आखिर किस आधार पर मुआवजे की राशि तय की जाती है? क्या यह धर्म और जाति देख कर तय होती है?

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