संयुक्त बलों को ऐतिहासिक सफलता
झारखंड पुलिस और सीआरपीएफ के संयुक्त नेतृत्व में चाईबासा जिले के सारंडा जंगल में चलाए जा रहे नक्सल उन्मूलन अभियान को बड़ी सफलता मिली है। किरीबुरू थाना क्षेत्र में संचालित विशेष अभियान ‘मेधाबुरू’ के तहत सुरक्षा बलों ने 15 नक्सलियों को मार गिराया है। मुठभेड़ में भारी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद और दैनिक उपयोग की सामग्री भी बरामद की गई है।
सुबह 6:30 बजे से कई दौर की मुठभेड़
पुलिस सूत्रों के अनुसार, 22 जनवरी 2026 की सुबह करीब 6:30 बजे से 209 कोबरा, झारखंड जगुआर, सीआरपीएफ और जिला पुलिस के संयुक्त दस्ते की नक्सलियों से कई बार मुठभेड़ हुई। नक्सलियों ने सुरक्षा बलों को नुकसान पहुंचाने के इरादे से अंधाधुंध फायरिंग की, जिसके जवाब में आत्मरक्षा में सुरक्षा बलों ने भी कार्रवाई की। इस दौरान 15 नक्सली मारे गए।
11 मारे गए नक्सलियों की हुई पहचान
प्रारंभिक जांच में मारे गए 15 नक्सलियों में से 11 की पहचान कर ली गई है। इनमें सबसे बड़ा नाम अनल उर्फ पतिराम मांझी का है, जो झारखंड, ओडिशा और एनआईए मामलों में कुल मिलाकर करोड़ों रुपये का इनामी था। उसके अलावा अनमोल उर्फ सुशांत, अमित मुंडा, पिंटू लोहरा, लालजीत उर्फ लालु समेत कई सक्रिय माओवादी कैडर शामिल हैं, जिन पर दर्जनों संगीन मामले दर्ज थे।
कोल्हान क्षेत्र में हिंसा का था मुख्य सूत्रधार
पुलिस के अनुसार, वर्ष 2022 से अब तक कोल्हान और सारंडा क्षेत्र में हुए आईईडी विस्फोटों और हिंसक घटनाओं में अनल उर्फ पतिराम मांझी के दस्ते की प्रमुख भूमिका रही है। सुरक्षा बलों को नुकसान पहुंचाने की कई बड़ी साजिशों के पीछे यही दस्ता सक्रिय था।
नक्सली नेटवर्क को लगा करारा झटका
इस ऑपरेशन को माओवादी संगठन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस कार्रवाई से इलाके में सक्रिय नक्सली नेटवर्क की “कमर टूट गई है” और संगठन की संचालन क्षमता पर गंभीर असर पड़ा है।
आत्मसमर्पण की अपील, सर्च ऑपरेशन जारी
झारखंड पुलिस ने शेष बचे नक्सलियों से अपील की है कि वे हथियार छोड़कर राज्य सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति का लाभ उठाएं। फिलहाल इलाके में सर्च अभियान जारी है और आगे की कार्रवाई पूरी होने के बाद विस्तृत जानकारी अलग से साझा की जाएगी।
