मंईयां सम्मान योजना: अप्रैल की किस्त अब तक लंबित, मई-जून पर भी असमंजस.

झारखंड/बिहार ताज़ा ख़बर विधानसभा चुनाव

मंईयां सम्मान योजना में फिर देरी, 10 जिलों की महिलाएं अब भी इंतजार में
भौतिक सत्यापन और प्रशासनिक शून्यता बनी अड़चन, 5 लाख लाभुकों को नहीं मिली अप्रैल की किस्त


मुख्य बिंदु:

  • झारखंड की मंईयां सम्मान योजना की अप्रैल किस्त अब तक 10 जिलों में लंबित

  • 47 लाख महिलाओं को मिली राशि, 5 लाख अब भी इंतजार में

  • भुगतान की तय समयसीमा हर माह 15 तारीख, फिर भी बार-बार हो रही देरी

  • निदेशक पद रिक्त होने से जिला स्तर पर प्रक्रिया अटकी

  • मई-जून की किस्त को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं



केवल 14 जिलों में पहुंची अप्रैल की राशि, 10 जिलों की महिलाएं परेशान

रांची। झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी मंईयां सम्मान योजना एक बार फिर समय पर भुगतान को लेकर सवालों में घिर गई है। योजना के तहत अप्रैल माह की 2,500 रुपये की किस्त अब तक केवल 14 जिलों के लाभुकों को ही भेजी जा सकी है, जबकि 10 जिलों — चतरा, खूंटी, गुमला, रांची, पूर्वी सिंहभूम, दुमका, देवघर, धनबाद, हजारीबाग और बोकारो — की लाखों महिलाएं अब भी अपने खातों में राशि आने का इंतजार कर रही हैं।

अब तक 47 लाख को भुगतान, 5 लाख लाभुकों के खाते खाली

योजना के तहत अब तक लगभग 47 लाख महिलाओं को अप्रैल की किस्त दी जा चुकी है। हालांकि, शेष करीब 5 लाख लाभुकों को इस सप्ताह के अंत तक राशि भेजे जाने की बात कही जा रही है। गौरतलब है कि योजना के दिशानिर्देशों के अनुसार, हर महीने की 15 तारीख तक किस्तों का भुगतान किया जाना चाहिए, लेकिन कई बार यह समयसीमा पार हो जाती है जिससे लाभुकों में नाराजगी गहराती जा रही है।

देरी की दो बड़ी वजहें: सत्यापन अधूरा और खाली प्रशासनिक पद

इस बार की देरी के पीछे दो प्रमुख कारण सामने आए हैं। पहला, कई प्रखंडों में लाभुकों का भौतिक सत्यापन अब तक अधूरा है, जिसके कारण उनके खाते में भुगतान अटका हुआ है। दूसरा, सामाजिक सुरक्षा निदेशालय में निदेशक का पद रिक्त है, जिससे योजना के क्रियान्वयन में प्रशासनिक गतिरोध उत्पन्न हो गया है।

पिछली निदेशक समीरा एस. के स्थानांतरण के बाद अब तक कोई नया निदेशक नियुक्त नहीं हो पाया है, जबकि किस्तों की स्वीकृति की अंतिम जिम्मेदारी निदेशक स्तर पर ही होती है।

22 जून के बलिदान दिवस की तैयारी जोरों पर, सुदेश की आज समीक्षा बैठक.

बजट जारी, फिर भी मई-जून की किस्त पर असमंजस

सरकार ने पहले ही योजना के लिए आठ महीने का बजट अलॉट कर दिया है। इसके बावजूद मई और जून की किस्तों को लेकर अब तक कोई आधिकारिक निर्णय नहीं लिया गया है, जिससे लाभुकों की चिंता और बढ़ गई है।

योजना की विश्वसनीयता पर उठे सवाल

राज्य भर में 50 लाख से अधिक महिलाओं को लाभ देने वाली इस योजना में लगातार हो रही देरी ने इसकी कार्यक्षमता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां एक ओर सरकार इसे महिलाओं के सशक्तिकरण का बड़ा कदम मानती है, वहीं दूसरी ओर बार-बार की तकनीकी और प्रशासनिक देरी से योजना की विश्वसनीयता प्रभावित हो रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *