झारखंड जनाधिकार महासभा का बड़ा बयान: “25 साल बाद भी आंदोलन के सपने अधूरे, राजनीतिक वर्ग जिम्मेदार”
मुख्य बिंदु
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झारखंड जनाधिकार महासभा ने राज्य की 25वीं वर्षगांठ पर राजनीतिक दलों को घेरा
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वक्तव्य में नेताओं पर “आंदोलन के सपनों से भटकने” का गंभीर आरोप
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15 नवंबर को कोकर से अल्बर्ट एक्का चौक तक “झारखंडी एकता यात्रा” का आयोजन
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प्राकृतिक संसाधनों, शिक्षा, श्रम स्थितियों और नीतियों पर तीखी टिप्पणी
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CNT-SPT, PESA और वनाधिकार अधिनियम की उपेक्षा का आरोप
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भ्रष्टाचार, कंपनियों की बढ़ती दखल और सामाजिक विभाजन पर चिंता
25 साल का झारखंड: महासभा का कटाक्ष — “सपने पहले से ज्यादा दूर”
झारखंड अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूरे कर रहा है, लेकिन इसी बीच झारखंड जनाधिकार महासभा ने राज्य की स्थिति पर व्यापक चिंता जाहिर करते हुए एक विस्तृत वक्तव्य जारी किया है। महासभा ने कहा कि जिस झारखंड के लिए आंदोलनकारियों ने लड़ाई लड़ी, वह सपना आज पहले से कहीं दूर नजर आता है। संस्था ने सभी राजनीतिक दलों के नेताओं को सीधे संबोधित करते हुए कहा कि जनता की उम्मीदों के विपरीत, अधिकांश नेताओं ने आंदोलन की मूल भावना की अनदेखी की है।
15 नवंबर को ‘झारखंडी एकता यात्रा’, जनता को जोड़ने की पहल
महासभा और इसके सहयोगी संगठनों ने 15 नवंबर 2025 को एक “झारखंडी एकता यात्रा” निकालने की घोषणा की है। यह यात्रा कोकर स्थित बिरसा समाधि स्थल से शुरू होकर अल्बर्ट एक्का चौक तक जाएगी। इसके माध्यम से लोगों को आंदोलन की मूल भावना—एकता, स्वाभिमान और संसाधनों पर हक—की याद दिलाई जाएगी। महासभा ने समाज के सभी वर्गों से इसमें शामिल होने की अपील की है।
“राजनीतिक वर्ग जिम्मेदार” — महासभा का आरोप
जारी बयान में कहा गया है कि झारखंड आंदोलन का लक्ष्य था कि स्थानीय समुदाय अपनी सभ्यता और प्रकृति के साथ तालमेल रखते हुए विकास कर सके। मगर, महासभा का आरोप है कि वर्षों में राजनीतिक वर्ग ने जनता के हित से अधिक अपने हितों को प्राथमिकता दी। शक्तिशाली कंपनियों के साथ गठजोड़, संसाधनों का सौदा, जनहितकारी नीतियों की अनदेखी और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने जैसे आरोप बयान में दर्ज हैं।
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शिक्षा, रोजगार और नीतियों पर गंभीर सवाल
महासभा ने कहा कि सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था बिगड़ चुकी है और लाखों युवा मजबूर होकर प्रवासी मजदूर बन रहे हैं। नरेगा में भ्रष्टाचार, बेरोजगारी में वृद्धि और विस्थापन नीति की असफलता जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया है। साथ ही, CNT-SPT, PESA और वनाधिकार अधिनियम के पालन में भारी लापरवाही का आरोप लगाया गया है।
“एकता खत्म, समाज को बांटा गया”
वक्तव्य में कहा गया कि “धन नहीं, एकता सही” आंदोलन का प्रमुख नारा था, लेकिन नेताओं ने समाज को बांटने की राजनीति कर इसे कमजोर किया। महासभा ने चेतावनी दी कि यदि नेता अपने तौर-तरीकों को नहीं बदलते, तो जनता उन्हें नकारने में देर नहीं करेगी।
नई पीढ़ी के नेतृत्व की उम्मीद
महासभा ने कहा कि उम्मीद है कि ऐसी नई राजनीतिक पीढ़ी उभरेगी, जो जनता की समस्याओं और आंदोलन की भावना को समझकर काम करेगी। महासभा ने अपने कई कार्यकर्ताओं और समर्थकों के नाम संयुक्त वक्तव्य में शामिल किए हैं।
