झारखंड शिक्षक भर्ती से बाहर CTET छात्र, बोले – हम भी हैं झारखंडी, हमें क्यों नकारा?

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मुख्य बिंदु 

  • CTET पास झारखंडी छात्रों को सहायक आचार्य नियुक्ति से बाहर किया गया

  • कोर्ट के आदेश पर JSSC ने संशोधित की चयन प्रक्रिया

  • छात्रों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लिखा पत्र

  • कहा: 9 साल से JTET नहीं हुआ, तो हमारा क्या दोष?

  • बिहार जैसे राज्यों में CTET मान्य, झारखंड में क्यों नहीं?

  • उम्र सीमा पार होने की कगार पर हैं कई CTET अभ्यर्थी



CTET पास अभ्यर्थी बोले – “हम भी झारखंडी हैं, हमसे कैसा अन्याय?”

झारखंड में सहायक आचार्य नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इस बार CTET (Central Teacher Eligibility Test) पास छात्रों ने मोर्चा खोल दिया है। झारखंड राज्य के इन छात्रों ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा उन्हें नियुक्ति प्रक्रिया से बाहर किए जाने पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भावुक पत्र लिखा है।

छात्रों का कहना है कि वे झारखंड के मूलवासी हैं, राज्य की स्थानीय भाषाओं में दक्ष हैं और उन्होंने सभी शैक्षणिक योग्यताओं को पूरा किया है। इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद JSSC ने उन्हें नियुक्ति प्रक्रिया से बाहर कर दिया।

वे सवाल कर रहे हैं कि जब पिछले 9 वर्षों से झारखंड पात्रता परीक्षा (JTET) आयोजित ही नहीं हुई है, तो फिर उन्हें बाहर क्यों किया गया? खास बात यह है कि बिहार जैसे राज्यों में CTET को मान्यता दी जाती है, लेकिन झारखंड में इसे खारिज किया जा रहा है।


हेमंत सोरेन को लिखा गया अभ्यर्थियों का पत्र – जस का तस

माननीय मुख्यमंत्री झारखंड सरकार

श्री हेमंत सोरेन जी

महोदय

निवेदन पूर्वक कहना है कि अभी वर्तमान में चल रहे झारखंड सहायक आचार्य के नियुक्ति की प्रक्रिया में हम सभी झारखंड राज्य के मूलवासी केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (CTET) उत्तीर्ण छात्रों ने परीक्षा दिया है और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग के द्वारा जारी किए गए उत्तर कुंजी के बाद अच्छे अंक प्राप्त किए हैं।

महोदय हम सभी सीटेट पास अभ्यर्थी भी झारखंड के मूलवासी हैं एवं झारखंड के क्षेत्रीय भाषा का ज्ञान भी रखते हैं और इसकी परीक्षा भी हमलोगों ने दिया है। और इसके बावजूद भी हम सभी सीटेट पास अभ्यर्थी इस नियुक्ति प्रक्रिया से बाहर हो गए।

ऐसा इसलिए हुआ कि हमलोग को माननीय सर्वोच्च न्यायालय से निर्णय के माध्यम से ये कहा गया है कि हमलोगों को इस नियुक्ति प्रक्रिया में सरकार के द्वारा बीच में संशोधन करके शामिल किया गया, जो कि सरकार ने JTET पास अभ्यर्थी के मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 14) समानता का अधिकार तथा (अनुच्छेद 16) नौकरी एवं रोजगार में समान अवसर की समानता के अधिकारों का हनन किया गया है।

लेकिन महोदय हम सभी झारखंडी सीटेट पास अभ्यर्थी ये जानना चाहते हैं कि क्या हमारा कुछ भी मौलिक अधिकार नहीं है? क्या हमारे मौलिक अधिकार का हनन नहीं हुआ है, जबकि बीते 9 सालों में झारखंड राज्य में किसी कारणवश झारखंड पात्रता परीक्षा (JTET) का आयोजन नहीं हो सका है।

भारत के विभिन्न राज्यों में सीटेट को मान्यता दी गई है। गौर करने वाली बात ये है कि हमारे पड़ोसी राज्य बिहार में भी सीटेट को मान्यता दी गई है, लेकिन हमलोग झारखंड के होने के बावजूद भी हमलोगों को झारखंड में शिक्षक भर्ती में शामिल होने से वंचित कर दिया गया।

महोदय सहायक आचार्य के नियुक्ति में शामिल हुए सीटेट पास वैसे भी अभ्यर्थी हैं जिन्होंने 2016 में जेटेट की परीक्षा तो दिया था परंतु किसी कारण वश वो उत्तीर्ण नहीं हो सके लेकिन उन्होंने उसी साल या उसके तुरंत बाद में सीटेट पास कर लिया और वर्तमान के झारखंड सहायक आचार्य भर्ती परीक्षा में शामिल हुए, लेकिन वो लोग भी इस बहाली प्रक्रिया से बाहर कर दिए गए जिनकी उम्र सीमा समाप्त होने के कगार पर है।

तो महोदय आपसे इतना ही विनती है कि हम सभी झारखंडी सीटेट पास अभ्यर्थी के इस समस्या को संज्ञान में लेते हुए इस समस्या का समाधान किया जाए और हम सभी झारखंडी सीटेट पास अभ्यर्थी के साथ न्याय किया जाए।

आपका विश्वासी
समस्त झारखंडी सीटेट पास अभ्यर्थी



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आगे क्या?

अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इस पत्र और गुहार पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं। क्या CTET पास छात्रों को राहत मिलेगी? या फिर यह मामला और भी बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनकर उभरेगा?

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