बंधु तिर्की ने CM हेमंत सोरेन से की मुलाकात, नगड़ी ज़मीन अधिग्रहण रद्द करने और टाना भगतों के विकास की उठाई मांग
मुख्य बातें:
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बंधु तिर्की ने नगड़ी मौजा की रैयत भूमि के रिम्स-2 निर्माण हेतु अधिग्रहण को बताया “विकास विरोधी”
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मुख्यमंत्री से की योजना रद्द करने की मांग, ग्रामीणों की आजीविका पर बताया खतरा
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पेसा कानून को लागू करने और टाना भगत समुदाय की स्थिति सुधारने की भी रखी मांग
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टाना भगत विकास प्राधिकरण को निष्क्रिय बताते हुए कार्यान्वयन को ज़मीनी स्तर पर लाने पर दिया जोर\
नगड़ी ज़मीन अधिग्रहण पर बंधु तिर्की का विरोध
रांची, झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष और पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात कर नगड़ी मौजा में रैयतों की भूमि पर हो रहे रिम्स-2 अस्पताल निर्माण के लिए अधिग्रहण प्रक्रिया को तत्काल रद्द करने की मांग की है। उन्होंने इसे ग्रामीणों की आजीविका पर सीधा हमला बताते हुए “विकास विरोधी” करार दिया।
तिर्की ने कहा कि इस ज़मीन पर वर्षों से ग्रामीण खेती कर जीवन यापन कर रहे हैं, और इस अधिग्रहण से उनका भरोसा सरकार से उठ सकता है। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की कि इस योजना को रद्द करने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित करें।
रैयतों की भूमि अधिग्रहण: योजनाओं की पुरानी विफलताएं भी रहीं कारण
बंधु तिर्की ने कहा कि इससे पहले भी IIM, IIIT और राष्ट्रीय उच्च पथ चौड़ीकरण जैसी योजनाओं के लिए ग्रामीणों की जमीन अधिग्रहित करने की कोशिशें हुई थीं, लेकिन जनविरोध के कारण वे योजनाएं रद्द करनी पड़ीं। अब रिम्स-2 के नाम पर ज़मीन लेने की साज़िश जनभावनाओं के विपरीत है।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि नगड़ी अंचल में अनुपातिक रूप से खेती योग्य भूमि की कमी है, और अधिकांश ग्रामीण खेती पर ही निर्भर हैं। यहाँ के सामाजिक और भौगोलिक परिप्रेक्ष्य को गुरुजी शिबू सोरेन और खुद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भलीभांति जानते हैं।
1956 से जारी हो रही है मालगुजारी रसीद, ग्रामीणों के पास वैध दस्तावेज़
तिर्की ने खुलासा किया कि 17 मई 2025 को रैयतों को जानकारी मिली कि सरकारी अमीन द्वारा ज़मीन की मापी की जा रही है, जबकि 1956-57 से 2012 तक की मालगुजारी रसीदें रैयतों के नाम पर जारी होती रही हैं। इससे स्पष्ट है कि रैयतों का मालिकाना हक है, जिसे अनदेखा करना न्यायसंगत नहीं।
पेसा कानून को शीघ्र लागू करने की अपील
पूर्व मंत्री ने मुख्यमंत्री से पेसा नियमावली को अंतिम रूप देकर कानून लागू करने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि यह कानून ग्रामीणों की आकांक्षाओं, जल-जंगल-जमीन और मानव संसाधनों से गहराई से जुड़ा हुआ है। साथ ही इससे विस्थापन, पलायन और भूमि लूट पर नियंत्रण पाने में भी मदद मिलेगी।
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टाना भगतों की दशा पर जताई चिंता, प्राधिकरण को सक्रिय करने की मांग
बंधु तिर्की ने झारखंड के टाना भगत समुदाय की निराशाजनक आर्थिक और सामाजिक स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह समुदाय महात्मा गांधी का अनुयायी और सत्याग्रह आंदोलन का हिस्सा रहा है, लेकिन इनका अपेक्षित विकास नहीं हुआ है।
उन्होंने मुख्यमंत्री से 28 अप्रैल 2017 को गठित टाना भगत विकास प्राधिकार को ज़मीनी स्तर पर प्रभावी बनाने और योजनाओं को लागू कराने के निर्देश देने की मांग की।
