Hemant Soren statement Babulal Marandi attack

QR कोड, चंदा और कोर्ट-कचहरी: CGL छात्रों पर टिप्पणी के बाद राजनीति

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JSSC-CGL पर सियासत गरम: छात्रों के चंदे वाले बयान पर BJP का पलटवार, हेमंत सोरेन से वकीलों की फीस पर सवाल

रांची: झारखंड में JSSC-CGL परीक्षा और छात्रों के आंदोलन को लेकर सियासी बयानबाज़ी तेज़ हो गई है। मुख्यमंत्री Hemant Soren द्वारा CGL नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम के दौरान छात्रों के चंदा और QR कोड वाले बयान पर अब भाजपा ने तीखा पलटवार किया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष Babulal Marandi ने मुख्यमंत्री के बयान को गरीब और संघर्षरत छात्रों का अपमान बताया है।

मुख्यमंत्री के बयान से शुरू हुआ विवाद

कल CGL छात्रों को नियुक्ति पत्र सौंपते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा था कि कोर्ट-कचहरी के नाम पर QR कोड से चंदा इकट्ठा किया गया, करोड़ों रुपए जुटाए गए और तकनीक का दुरुपयोग हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि परीक्षा झारखंड में होती है और पेपर लीक की अफवाह नेपाल से उड़ाई जाती है, जो गंभीर साजिश का संकेत है। मुख्यमंत्री ने आगे चेतावनी दी कि भविष्य में ऐसे मामलों में सख़्त कार्रवाई होगी।

भाजपा का पलटवार: गरीब छात्रों का मज़ाक

इस बयान के बाद बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया पर लंबी प्रतिक्रिया साझा करते हुए कहा कि जो व्यक्ति झारखंड को लूटकर अपने वकीलों की फीस भर रहा हो, वह चंदा करके न्याय मांगने वाले गरीब छात्रों का मज़ाक बना रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल जाने से बचने के लिए रांची से लेकर दिल्ली तक वकीलों की फौज खड़ी करने में कितने करोड़ रुपये खर्च किए गए।

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फोन जांच और नेपाल अफवाह पर सवाल

भाजपा अध्यक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने जांच एजेंसियों के सामने फोन की जांच कराने से मना किया था। नेपाल से पेपर लीक की बात को लेकर उन्होंने पूछा कि अगर यह महज़ अफवाह है तो JSSC-CGL मामले में अब तक हाईकोर्ट से क्लीन चिट क्यों नहीं मिली? जब गड़बड़ी नहीं हुई तो 10 छात्रों का परिणाम अभी तक लंबित क्यों है और अदालत ने जांच जारी रखने का आदेश क्यों दिया हुआ है?

छात्रों का पक्ष: चंदा मजबूरी

भाजपा ने यह तर्क भी दिया कि गरीब और साधनहीन छात्र ‘सोने का चम्मच’ लेकर पैदा नहीं होते। ऐसे में जब नियुक्ति और परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल खड़े होते हैं तो न्याय के लिए चंदा और QR कोड जैसे साधनों का सहारा लेना उनकी मजबूरी बन जाती है, न कि कोई साजिश।

राजनीतिक टकराव के बीच असल सवाल

इस पूरे विवाद के बीच असल सवाल यही है कि JSSC-CGL परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की सच्चाई क्या है और छात्रों को समय पर न्याय कब मिलेगा। एक तरफ सरकार अफवाह और साजिश की बात कर रही है, तो दूसरी तरफ विपक्ष अदालत के आदेशों और लंबित परिणामों को आधार बनाकर सवाल उठा रहा है।

JSSC-CGL मामला अब केवल भर्ती प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सरकार बनाम विपक्ष की सियासी लड़ाई का केंद्र बन चुका है। बयानबाज़ी तेज़ है, लेकिन छात्रों की उम्मीदें अभी भी न्याय और पारदर्शिता पर टिकी हैं।

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