झारखंड विधानसभा चुनाव से पहले पारा शिक्षक फिर से सड़क पर उतरने का मन बना चुके हैं। वेतनमान और स्थाईकरण समेत अन्य प्रमुख मांगों को लेकर पारा शिक्षक एक बार फिर से आंदोलन के रास्ते पर चलने को तैयार हैं।
आंदोलन की तिथियां और रणनीति
पारा शिक्षकों के नेता संजय दुबे ने जानकारी दी कि, 26 जून को सत्ता पक्ष के विधायकों को ज्ञापन सौंपा जाएगा। इसके बाद, 30 जून को सभी जिलों में मशाल जुलूस निकाली जाएगी। 8 जुलाई को उपायुक्त के माध्यम से मुख्यमंत्री को पत्र भेजा जाएगा। यदि इसके बाद भी उनकी मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो 20 जुलाई से तमाम पारा शिक्षक रांची में एकत्रित होंगे और एक बड़े आंदोलन की शुरुआत होगी।
पारा शिक्षकों की प्रमुख मांगें
न्यूज़ मॉनिटर से बातचीत करते हुए संजय दुबे ने कहा कि, पारा शिक्षकों को शुरू से ठगा जा रहा है। उन्होंने कहा कि, पारा शिक्षकों को सीधे वेतनमान और स्थायीकरण दिया जाना चाहिए। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग द्वारा ली जा रही परीक्षा में बहुत कम पारा शिक्षक सफल हो पाएंगे। क्योंकि ज्यादातर समय स्कूल में देने की वजह से पारा शिक्षकों के पास खुद की पढ़ाई के लिए समय नहीं रहता है।
पारा शिक्षकों की स्थिति
झारखंड के पारा शिक्षक लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। उनकी प्रमुख मांगें वेतनमान और स्थायीकरण है। सरकार से इन मांगों को पूरा करने की अपील करते हुए संजय दुबे ने कहा कि, पारा शिक्षक अपनी मेहनत और लगन से बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं, लेकिन उनकी अपनी स्थिति दयनीय बनी हुई है।
आंदोलन की संभावनाएँ
अगर 20 जुलाई तक पारा शिक्षकों की मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो यह आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है। रांची में होने वाले इस आंदोलन से सरकार पर दबाव बढ़ सकता है और पारा शिक्षकों की स्थिति में सुधार की संभावना भी बढ़ सकती है।
निष्कर्ष
झारखंड विधानसभा चुनाव से पहले पारा शिक्षकों का यह आंदोलन सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती हो सकता है। उनकी प्रमुख मांगें वेतनमान और स्थायीकरण से जुड़ी हैं, जिन पर सरकार को जल्द ही ध्यान देना होगा। इस आंदोलन की सफलता या असफलता, पारा शिक्षकों के भविष्य को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
