ब्रिज कोर्स निर्माण को लेकर JCERT की कार्यशाला सम्पन्न, 23 से 26 जून तक होगी वर्कशॉप का आयोजन
मुख्य बिंदु:
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23 से 26 जून 2025 तक आउट ऑफ स्कूल बच्चों के लिए ब्रिज कोर्स वर्कशॉप
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JCERT द्वारा VISWA में हुआ लर्निंग आउटकम्स और स्प्लिट सिलेबस पर केंद्रित सत्र
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PRATHAM, CINI, TATA TRUST और UNICEF India का सहयोग
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PRATHAM के मौजूदा मॉड्यूल को भी प्रस्तुत किया गया
आउट ऑफ स्कूल बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की पहल
झारखंड में शिक्षा के क्षेत्र में एक अहम कदम उठाते हुए JCERT (Jharkhand Council of Educational Research and Training) द्वारा आगामी 23 जून से 26 जून 2025 तक आउट ऑफ स्कूल चिल्ड्रन (OOSC) को मुख्यधारा में लाने के उद्देश्य से ब्रिज कोर्स निर्माण पर आधारित कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है।
इस वर्कशॉप का मुख्य उद्देश्य उन बच्चों को दोबारा स्कूली शिक्षा प्रणाली से जोड़ना है, जो किसी कारणवश शिक्षा से वंचित रह गए हैं।

VISWA परिसर में हुआ प्री-वर्कशॉप सेशन
कार्यशाला की तैयारी के तहत आज VISWA परिसर में JCERT द्वारा एक विस्तृत पूर्व कार्यशाला (Pre-Workshop) आयोजित की गई। इसमें राज्य स्तर पर लर्निंग आउटकम्स, स्टेट करिकुलम फ्रेमवर्क और स्प्लिट सिलेबस को ब्रिज कोर्स में कैसे शामिल किया जाए, इस पर गहन चर्चा की गई।

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का मिला सहयोग
इस कार्यक्रम में देश के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संगठन PRATHAM, CINI और TATA TRUST के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। कार्यशाला में PRATHAM द्वारा पूर्व में विकसित Out of School Children Modules को प्रस्तुत किया गया, जिससे प्रतिभागियों को व्यवहारिक जानकारी मिल सकी।
इस कोर्स निर्माण में UNICEF India की तकनीकी और रणनीतिक सहयोग भी प्राप्त हो रहा है, जो इसे और प्रभावी बनाने की दिशा में अहम भूमिका निभा रहा है।
आगे की योजना
23 से 26 जून के बीच होने वाली इस वर्कशॉप में शिक्षाविदों, मॉड्यूल डिजाइनरों और क्षेत्रीय विशेषज्ञों की सहभागिता के साथ ब्रिज कोर्स की सामग्री, स्तर और क्रियान्वयन की रूपरेखा तय की जाएगी। इस कोर्स के माध्यम से बिना स्कूल गए बच्चों को उनके स्तर के अनुसार सीखने योग्य वातावरण देना मुख्य उद्देश्य है।
यह कार्यशाला झारखंड सरकार की उस नीति को बल देती है, जिसके तहत हर बच्चा स्कूल में हो और कोई भी शिक्षा से वंचित न रहे। JCERT, यूनिसेफ और अन्य संस्थाओं की यह संयुक्त पहल राज्य के शिक्षा क्षेत्र में एक सकारात्मक बदलाव की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकती है।
