झारखंड में लोकसभा चुनाव के दौरान प्रियंका गांधी पहली बार एक दिवसीय दौरे पर झारखंड आ रही हैं। आज वे गोड्डा और रांची लोकसभा क्षेत्र के लिए पार्टी प्रत्याशियों के हक में वोट मांगेंगी। गोड्डा से प्रदीप यादव कांग्रेस के प्रत्याशी हैं जबकि भाजपा की तरफ से निशिकांत दुबे हैं। रांची से यशस्विनी सहाय के सामने बीजेपी के संजय सेठ मुकाबला कर रहे हैं।
गोड्डा से प्रदीप यादव और निशिकांत दुबे के बीच मुकाबला.
सुबह करीब 11:30 बजे गोड्डा में प्रियंका गांधी चुनावी सभा को संबोधित करेंगी। आपको बता दें कि, इससे पहले कांग्रेस पार्टी की तरफ से दीपिका पांडे सिंह को गोड्डा से प्रत्याशी बनाया गया था लेकिन बाद में विरोध को देखते हुए प्रदीप यादव को चुनावी मैदान में उतारा गया है। माना जा रहा है कि, निशिकांत दुबे के सामने प्रदीप यादव अच्छी टक्कर दे सकते हैं। फिलहाल प्रदीप यादव कांग्रेस पार्टी के विधायक हैं। संथाल में होने के साथ ही गोड्डा सीट इस वजह से भी महत्वपूर्ण है कि, वहां से निशिकांत दुबे बीजेपी के निवर्तमान सांसद हैं। निशिकांत दुबे लगातार सोरेन परिवार और सरकार पर हमला बोलते रहे हैं।
रांची से यशस्विनी सहाय का संजय सेठ से मुकाबला.
जहां तक रांची लोकसभा सीट का प्रश्न है तो यहां से पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोध की सुपुत्री को मौका दिया गया है। रांची लोकसभा सीट से दूसरी बार चुनाव लड़ रहे हैं बीजेपी के प्रत्याशी संजय सेठ। आमतौर पर यह माना जा रहा है कि, संजय सेठ आसानी के साथ जीत हासिल कर लेंगे। हालांकि इंडिया गठबंधन ने रांची लोकसभा सीट के लिए पूरी ताकत लगा दी है।
पीएम और गृहमंत्री का रोड शो.
रांची में संजय सेठ के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रोड शो कर चुके हैं। इतना ही नहीं देश के गृह मंत्री अमित शाह भी संजय सेठ के लिए रोड शो कर वोट मांग चुके हैं। आज भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सांसद तेजस्वी सूर्या भी जनसभा करने जा रहे हैं। संजय सेठ के नामांकन में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आ चुके हैं। केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण भी रांची में संजय सेठ के लिए वोट मांग चुकी हैं। इसके साथ ही कई पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी संजय सेठ के पक्ष में प्रचार प्रचार कर रहे हैं।
दूसरी तरफ यशस्विनी सहाय के लिए कांग्रेस की तरफ से कोई भी बड़ा नेता अब तक चुनाव प्रचार में नहीं पहुंचा है। पहली बार प्रियंका गांधी यशस्विनी सहाय के लिए वोट मांगने पहुंच रही हैं। उनके नामांकन में भी कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी गुलाम अहमद मीर के अलावा कोई भी बड़ा नेता मौजूद नहीं था। साथ ही कांग्रेस की तरफ से किसी भी बड़े चेहरे को यशस्विनी सहाय के पक्ष में उस तरह से नहीं उतारा गया है जैसा बीजेपी संजय सेठ के मामले में कर रही है। इससे साफ है कि, भाजपा रांची लोकसभा सीट को जितनी आसान मान रही थी उतनी आसान है नहीं। यही वजह है कि, प्रधानमंत्री से लेकर गृह मंत्री जैसे बड़े नेताओं को रांची में चुनावी सभाओं और रोड शो के लिए उतारा गया है।
जनता किसे देगी आशीर्वाद.
कुल मिलाकर कह सकते हैं कि, प्रचार प्रसार के मामले में बीजेपी कांग्रेस से कहीं आगे है लेकिन यशस्विनी सहाय डोर टू डोर कैंपेनिंग और छोटी-छोटी बैठकों के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही हैं। अब देखना होगा कि, रांची की जनता क्या दूसरी बार संजय सेठ को मौका देती है या फिर नई नस्ल को मौका देकर संसद भेजती है। यशस्विनी सहाय ने जिन मुद्दों को उठाया है वे युवाओं को ज्यादा आकर्षित करते हैं।
