JPSC ने जारी किया फाइनल रिजल्ट. टॉपर बना डीएसपी का शिष्य.

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विकास चंद्र श्रीवास्तव की पाठशाला ने रचा इतिहास, 140 से अधिक छात्रों ने झारखंड सिविल सेवा परीक्षा में पाई सफलता
टॉप-10 में शामिल चार छात्र, टॉपर बना डीएसपी का शिष्य

रांची, 25 जुलाई 2025:
झारखंड सिविल सेवा परीक्षा के नतीजों में एक बार फिर रांची के डीएसपी विकास चंद्र श्रीवास्तव और उनके शिष्यों का दबदबा देखने को मिला। उनके मार्गदर्शन में पढ़े 140 से भी अधिक छात्रों ने परीक्षा में सफलता हासिल की है। यही नहीं, टॉप-10 में चार छात्र उनके शिष्य हैं, जिनमें पहला स्थान प्राप्त करने वाले आशीष अक्षत भी शामिल हैं।

टॉपर बने आशीष अक्षत
राज्य में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले आशीष अक्षत रांची के रहने वाले हैं और झारखंड पुलिस के इंस्पेक्टर सुबोध श्रीवास्तव के बेटे हैं। वे डीएसपी विकास चंद्र श्रीवास्तव की पाठशाला में पढ़े हैं। आशीष की सफलता को डीएसपी के मार्गदर्शन और अनुशासित पढ़ाई का परिणाम माना जा रहा है।

टॉप-10 में चार शिष्य
परीक्षा के टॉप-10 में जिन चार छात्रों ने स्थान बनाया है, वे सभी डीएसपी श्रीवास्तव के छात्र हैं।
रैंक और नाम इस प्रकार हैं:

1. आशीष अक्षत

2. अभय कुजूर

3. स्वेता

4. संदीप प्रकाश

 

इन छात्रों ने न केवल मेहनत की, बल्कि डीएसपी के अनुभव और शिक्षण से प्रेरणा लेकर सफलता का परचम लहराया।

‘ऑफिसर मेकर’ बनते डीएसपी श्रीवास्तव
डीएसपी विकास चंद्र श्रीवास्तव अब केवल पुलिस अधिकारी नहीं, बल्कि युवाओं के लिए “ऑफिसर मेकर” बन चुके हैं। उनकी पाठशाला प्रशासनिक सेवा की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए उम्मीद की किरण बन गई है। अब तक उनके पढ़ाए 140 से अधिक छात्र विभिन्न पदों के लिए चयनित हो चुके हैं।

अनुशासन और आत्मविश्वास पर ज़ोर
श्रीवास्तव की कोचिंग पद्धति केवल किताबों तक सीमित नहीं है। वे छात्रों को अनुशासन, सामाजिक चेतना और आत्मविश्वास की भी शिक्षा देते हैं। यही वजह है कि उनके शिष्य परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करते हैं और समाज में अपनी अलग पहचान बनाते हैं।

डीएसपी श्रीवास्तव ने क्या कहा?
परीक्षा परिणामों पर प्रतिक्रिया देते हुए डीएसपी श्रीवास्तव ने कहा,

> “हर विद्यार्थी में क्षमता होती है, जरूरत होती है उसे सही दिशा देने की। मेरा लक्ष्य है कि झारखंड के हर गांव और कस्बे से युवा प्रशासनिक सेवा में पहुंचे।”

 

समाज के लिए प्रेरणा
डीएसपी विकास चंद्र श्रीवास्तव की यह पहल सिर्फ कोचिंग भर नहीं है, बल्कि एक सामाजिक अभियान बन चुकी है। उन्होंने अपनी सरकारी ड्यूटी के साथ-साथ युवाओं को एक नई दिशा देने का काम किया है। झारखंड में इस प्रयास को एक सकारात्मक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

निष्कर्ष
सिविल सेवा की तैयारी कर रहे झारखंड के हजारों छात्रों के लिए डीएसपी श्रीवास्तव की पाठशाला एक रोल मॉडल बनकर उभरी है। उनकी मेहनत और समर्पण न केवल परीक्षा के परिणामों में झलकती है, बल्कि आने वाले वर्षों में झारखंड की प्रशासनिक व्यवस्था में भी इसका प्रभाव साफ दिखाई देगा।

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