रांची की अल्फा टोप्पो ने लंदन में गूंजाया ‘जोहार’, झारखंड का नाम किया रोशन
मुख्य बिंदु
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रांची की अल्फा टोप्पो का लंदन में अंतरराष्ट्रीय मंच से सशक्त संबोधन
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LSE में मुख्यमंत्री व प्रतिनिधिमंडल के समक्ष रखा आदिवासी समाज का पक्ष
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ब्रिटिश सरकार की प्रतिष्ठित Chevening Scholarship से सम्मानित
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पब्लिक पॉलिसी में मास्टर्स कर झारखंड लौटकर काम करने का संकल्प
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आदिवासी युवाओं के लिए बनी प्रेरणा की मिसाल
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लंदन में गूंजा ‘जोहार’, झारखंड की पहचान को मिला वैश्विक मंच
लंदन में एक अलग ही स्वर गूंजा—‘जोहार’। यह स्वर था रांची की अल्फा टोप्पो का, जिन्होंने London School of Economics and Political Science में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री और उनके प्रतिनिधिमंडल के समक्ष प्रभावशाली संबोधन देकर न केवल अपनी पहचान बनाई, बल्कि पूरे झारखंड का मान बढ़ाया। पिस्का नगड़ी के कोलांबी गांव की साधारण आदिवासी पृष्ठभूमि से निकलकर अंतरराष्ट्रीय शिक्षा मंच तक पहुंची अल्फा की यह उपलब्धि राज्य के लिए गर्व का विषय बन गई है।
Chevening Scholarship से मिली वैश्विक पहचान
अल्फा टोप्पो को ब्रिटिश सरकार द्वारा वित्तपोषित प्रतिष्ठित Chevening Scholarship प्रदान की गई है। इस स्कॉलरशिप के तहत वे पब्लिक पॉलिसी में मास्टर्स डिग्री हासिल करेंगी।

अल्फा ने स्पष्ट किया है कि पढ़ाई पूरी करने के बाद वे भारत लौटेंगी और झारखंड की धरती पर रहकर अपने ज्ञान और अनुभव का उपयोग राज्य के विकास में करेंगी।
‘जोहार’ में दिखी आदिवासी संस्कृति की आत्मा
अपने संबोधन में अल्फा ने ‘जोहार’ शब्द के माध्यम से आदिवासी संस्कृति, सम्मान और पहचान को विदेशी मंच पर सजीव कर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही वह माध्यम है, जिससे हाशिए पर खड़े समुदायों की सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों का समाधान संभव है।
उनके शब्दों में जल, जंगल और जमीन से जुड़े आदिवासी जीवन का गहरा भाव झलक रहा था, जिसने श्रोताओं को भी भावुक कर दिया।
रांची से मुंबई, फिर लंदन तक का सफर
अल्फा टोप्पो ने अपनी प्रारंभिक उच्च शिक्षा St. Xavier’s College Ranchi से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने Tata Institute of Social Sciences, मुंबई से उच्च शिक्षा हासिल की।
पढ़ाई के दौरान उन्होंने छात्र संघ चुनाव जीतकर महासचिव का पद भी संभाला, जो उनकी नेतृत्व क्षमता और सामाजिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
आदिवासी समाज में खुशी और गर्व का माहौल
इस उपलब्धि पर उनके मित्र, सोशल एक्टिविस्ट और आदिवासी नेता अनिल अमिताभ पन्ना ने फोन पर बधाई देते हुए कहा कि अल्फा की सफलता झारखंड के आदिवासी समाज के लिए ऐतिहासिक क्षण है।
उन्होंने कहा कि यह साबित करता है कि शिक्षा ही वह सेतु है, जो गांव की गलियों से निकलकर वैश्विक मंचों तक पहुंचा सकता है।
आदिवासी युवाओं के लिए बनी उम्मीद की किरण
अल्फा टोप्पो की कहानी यह संदेश देती है कि झारखंड के कोलांबी जैसे गांव प्रतिभाओं से भरे हैं। Chevening Scholarship जैसी अंतरराष्ट्रीय मान्यता न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि पूरे राज्य को वैश्विक मानचित्र पर स्थापित करने वाला क्षण भी है।
‘जोहार’ अब केवल अभिवादन नहीं रहा, बल्कि आदिवासी अस्मिता, शिक्षा और परिवर्तन का प्रतीक बनकर दुनिया में गूंज रहा है।
