Jharkhand Teachers Protest

35 हजार शिक्षकों की नौकरी पर संकट, TET अनिवार्यता से बढ़ी चिंता.

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शिक्षकों का रांची में राजभवन मार्च.

मुख्य बिंदु:

  • सुप्रीम कोर्ट के आदेश से झारखंड के 35 हजार शिक्षकों की नौकरी खतरे में

  • शिक्षकों को TET पास करना अनिवार्य, असफल होने पर सेवा से मुक्त करने का प्रावधान

  • अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के बैनर तले निकाला गया राजभवन मार्च

  • राज्यपाल के माध्यम से प्रधानमंत्री को सौंपा गया ज्ञापन

  • RTE कानून में संशोधन और पुनर्विचार याचिका की मांग

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सुप्रीम कोर्ट का आदेश और शिक्षकों की नाराजगी

झारखंड के शिक्षक सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले से नाराज हैं। 1 सितंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को भी शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास करना अनिवार्य होगा। जो शिक्षक परीक्षा पास नहीं करेंगे, उन्हें सेवा से मुक्त कर दिया जाएगा। इस आदेश से राज्य के लगभग 35 हजार शिक्षकों की नौकरी खतरे में पड़ गई है।

Supreme Court TET Order 2025
शिक्षकों ने राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन, RTE कानून में संशोधन की मांग

राजभवन मार्च और सभा

इस फैसले के विरोध में अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के बैनर तले हजारों की संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाओं ने आज 20 सितंबर को कोर्ट कंपाउंड रांची से राजभवन तक मार्च किया। इसके बाद सभा आयोजित कर राज्यपाल के माध्यम से प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा गया।

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शिक्षकों की मांग

संघ ने अपने मांग पत्र में कहा कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) की 2010 की अधिसूचना में स्पष्ट किया गया था कि अधिसूचना जारी होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को TET की आवश्यकता नहीं होगी। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय कानूनी प्रावधानों के विपरीत है और चुनौती देने योग्य है।
शिक्षक संघ ने मांग की है कि भारत सरकार इस पर पुनर्विचार याचिका दायर करे और साथ ही RTE कानून में संशोधन कर शिक्षकों को राहत प्रदान करे।

नेताओं के संबोधन

सभा को महासचिव राम मूर्ति ठाकुर ने संबोधित किया और कहा कि झारखंड के शिक्षक इस विषय पर राष्ट्रीय स्तर की मुहिम के साथ मिलकर लड़ाई जारी रखेंगे।
इस मौके पर संघ के पूर्व अध्यक्ष उत्तिल यादव, अनूप केशरी, संगठन महामंत्री असदुल्लाह, कोषाध्यक्ष संतोष कुमार, उपाध्यक्ष राकेश कुमार व दीपक दत्ता, प्रमंडलीय अध्यक्ष अजय सिंह, सलीम सहाय तिग्गा, सुधीर दुबे, राजेश सिन्हा, सुनील कुमार, माणिक प्रसाद, अमरेश सिंह, व्रमचंद्र खेरवार, शंभू शरण शर्मा, विभूति कुमार, हरीश कुमार, उपेंद्र कुमार, बिनोद चौधरी, श्रीकांत सिन्ह और राधाकांत साह सहित कई नेताओं ने सभा को संबोधित किया।

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