झामुमो-कांग्रेस नहीं चाहते सरना आदिवासियों का भला: आजसू पार्टी का बयान.

ताज़ा ख़बर राष्ट्रीय ख़बर विधानसभा चुनाव

झामुमो-कांग्रेस नहीं चाहती सरना आदिवासियों का हित: आजसू पार्टी ने हेमंत सरकार पर बोला हमला

मुख्य बिंदु:

  • पेसा कानून लागू नहीं करने पर आजसू पार्टी ने जताई नाराजगी

  • 2019 और 2024 के चुनावी वादे अब तक अधूरे

  • आदिवासी स्वशासन और सांस्कृतिक अधिकारों का हो रहा हनन

  • शराब और बालू माफिया के दबाव में काम कर रही है सरकार

  • झारखंड पंचायत अधिनियम 2001 में संशोधन की मांग



चुनावी वादों को नहीं निभा रही सरकार: आजसू

आजसू पार्टी ने झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि वह पेसा कानून (पंचायत अनुसूचित क्षेत्र विस्तार अधिनियम, 1996) को ज्यों का त्यों लागू नहीं कर रही है। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता डॉ. देवशरण भगत और झारखंड आंदोलनकारी प्रवीण प्रभाकर ने कहा कि 2019 और 2024 के चुनावों में इस कानून को लागू करने का वादा किया गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इससे सरना आदिवासी समुदाय में गहरा असंतोष है।

झामुमो और कांग्रेस का आदिवासी विरोधी इतिहास: आजसू

नेताओं ने झामुमो और कांग्रेस पर आदिवासी विरोधी एजेंडे पर काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इन दलों का इतिहास रहा है कि इन्होंने 1993 में झारखंड आंदोलन के दौरान सौदेबाजी कर राज्य निर्माण को रोका था। अब फिर यही दल सरना आदिवासियों को छलने में लगे हैं।

शराब और बालू माफिया के दबाव में सरकार: आरोप

आजसू नेताओं ने दावा किया कि झामुमो और कांग्रेस की सरकार शराब और बालू माफियाओं के दबाव में काम कर रही है। यही कारण है कि सरकार पेसा कानून को हूबहू लागू करने से कतरा रही है। पार्टी ने मांग की है कि सरकार तुरंत झारखंड पंचायत राज अधिनियम, 2001 में आवश्यक संशोधन करे ताकि पेसा कानून की मूल भावना के अनुरूप क्रियान्वयन हो सके।

पेसा कानून के मूल उद्देश्यों की हो रही अनदेखी

आजसू नेताओं ने कहा कि पेसा कानून आदिवासी समुदायों को जल, जंगल और जमीन पर पारंपरिक स्वामित्व के अधिकार के साथ-साथ उनकी सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं की रक्षा का अवसर देता है। लेकिन सरकार ने पांच साल के कार्यकाल में इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की है, जिससे यह कानून केवल कागजों तक सीमित रह गया है।

ग्राम सभा और स्वशासन की उपेक्षा

सरकार ने ग्राम सभाओं को सशक्त करने और स्थानीय स्वशासन को बढ़ावा देने की बात तो की, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई बदलाव नहीं हुआ। इसका सबसे अधिक नुकसान सरना आदिवासी समुदायों को हो रहा है, जिनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर प्रतिकूल असर पड़ा है।

आजसू का ऐलान: अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष रहेगा जारी

आजसू नेताओं ने कहा कि उनकी पार्टी गांवों को सशक्त बनाने को प्राथमिकता देती है, क्योंकि मजबूत गांव ही मजबूत झारखंड और भारत की नींव हैं। उन्होंने ऐलान किया कि आदिवासी जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए पार्टी संघर्ष करती रहेगी और सरकार को जनता के प्रति जवाबदेह बनाने के लिए हर मंच पर आवाज उठाएगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *