भाजपा सांसद निशिकांत दुबे का बयान लोकतंत्र पर हमला: झारखंड मुक्ति मोर्चा की तीखी प्रतिक्रिया.
🔴 मुख्य बिंदु (Major Highlights):
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निशिकांत दुबे का न्यायपालिका पर विवादित बयान, जिसे झारखंड मुक्ति मोर्चा ने लोकतंत्र विरोधी करार दिया।
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भाजपा पर संवैधानिक संस्थाओं पर कब्जा करने का गंभीर आरोप – चुनाव आयोग, CBI, ED, अब न्यायपालिका भी निशाने पर।
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भाजपा की मनुस्मृति आधारित शासन व्यवस्था लागू करने की सोच का आरोप – संविधान को कमजोर करने की रणनीति।
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सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों पर आपत्ति जताकर भाजपा कर रही है न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल।
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बाबूलाल मरांडी और अन्य भाजपा नेताओं की चुप्पी पर सवाल – क्या निशिकांत दुबे के बयान से सहमत हैं?
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देश के गरीब, दलित, आदिवासी, पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्ग का न्यायपालिका पर गहरा विश्वास – उसपर हमला अस्वीकार्य।
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JMM ने कहा – जब फैसले भाजपा की सोच के मुताबिक नहीं आते, तो वह न्यायपालिका पर दबाव बनाने की कोशिश करती है।
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निशिकांत दुबे पहले भी संथाल परगना को झारखंड से अलग करने जैसे विभाजनकारी बयान दे चुके हैं।
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झामुमो की मांग – भाजपा यदि सच में न्यायपालिका का सम्मान करती है, तो दुबे को तत्काल पार्टी से बर्खास्त करे।
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JMM ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की – सांसद के बयान पर संज्ञान लेकर सख्त कार्रवाई करें।
लोकतंत्र के स्तंभ पर सवाल खड़े करना गंभीर: JMM
गोड्डा के भाजपा सांसद निशिकांत दुबे द्वारा न्यायपालिका को लेकर दिया गया बयान केवल एक व्यक्ति का विचार नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की आत्मा पर सीधा प्रहार है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने इस बयान को लोकतंत्र विरोधी मानसिकता की उपज बताया है और भाजपा पर संविधान के ढांचे को कमजोर करने का आरोप लगाया है।

संवैधानिक संस्थाओं पर नियंत्रण चाहती है भाजपा
JMM ने कहा कि भाजपा का असली उद्देश्य देश में मनुस्मृति आधारित व्यवस्था लागू करना है। उन्हें भारत के संवैधानिक ढांचे पर न तो विश्वास है, न सम्मान। चुनाव आयोग, प्रवर्तन निदेशालय (ED), केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) जैसी संस्थाओं की स्वायत्तता पहले ही खतरे में डाल दी गई है, अब बारी न्यायपालिका पर दबाव बनाने की है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों पर भी आपत्ति क्यों?
सांसद दुबे का बयान इस ओर इशारा करता है कि भाजपा अब सुप्रीम कोर्ट जैसे सर्वोच्च संवैधानिक संस्थान की निष्पक्षता और निर्णयों को भी स्वीकार नहीं कर रही। सवाल यह उठता है कि भाजपा आखिर इस देश को किस दिशा में ले जाना चाहती है?
बयान पर भाजपा नेतृत्व की चुप्पी चिंताजनक
JMM ने भाजपा नेताओं पर हमला करते हुए पूछा कि हमेशा हर मुद्दे पर बयानबाज़ी करने वाले बाबूलाल मरांडी और अन्य वरिष्ठ नेता इस संवेदनशील मामले में मौन क्यों हैं? क्या वे निशिकांत दुबे के बयान से सहमत हैं?
अगर नहीं, तो फिर स्पष्ट और सार्वजनिक तौर पर उनकी निंदा क्यों नहीं करते? चुप्पी इस बात का संकेत है कि यह बयान किसी व्यक्तिगत राय से अधिक, पार्टी की आंतरिक सोच का हिस्सा है।
न्यायपालिका पर देश के वंचित तबकों का भरोसा
JMM ने जोर देकर कहा कि देश की न्यायपालिका गरीबों, दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों की आखिरी उम्मीद है। भाजपा द्वारा इसके खिलाफ आरोपों और हमलों की रणनीति न केवल संविधान विरोधी है, बल्कि सामाजिक न्याय के विचार को भी धक्का पहुंचाने वाली है।
मनमाफिक फैसलों की चाह में दबाव की राजनीति
जब फैसले भाजपा की मंशा के अनुरूप नहीं आते, तो पार्टी या उसके नेता न्यायपालिका की निंदा करने लगते हैं। यह केवल दबाव की राजनीति है। अगर भाजपा सच में न्यायपालिका पर विश्वास रखती है, तो उसे निशिकांत दुबे को तत्काल पार्टी से बाहर निकाल देना चाहिए।
सांसद पहले भी कर चुके हैं विवादित बयान
JMM ने यह भी याद दिलाया कि यह वही सांसद हैं जिन्होंने संथाल परगना को झारखंड से अलग करने जैसी विभाजनकारी बातें पहले भी की हैं। उनकी विचारधारा पूरी तरह विभाजनकारी है और यह केवल व्यक्तिगत स्तर पर नहीं, बल्कि भाजपा और आरएसएस की सोच का प्रतिबिंब है।
झारखंड मुक्ति मोर्चा की स्पष्ट चेतावनी
JMM ने कहा है कि वह संवैधानिक संस्थाओं पर भाजपा के कब्जे की कोशिशों को बर्दाश्त नहीं करेगा। चाहे वह चुनाव आयोग हो, CBI हो या न्यायपालिका — इन संस्थाओं की स्वतंत्रता ही लोकतंत्र की पहचान है।
धर्मनिरपेक्षता को खत्म करने की साजिश
भाजपा एक बार फिर देश को हिंदू-मुस्लिम के बहाने बांटने की कोशिश कर रही है। उसका मकसद है देश के धर्मनिरपेक्ष चरित्र को खत्म करना, लेकिन उसकी यह साजिश कभी कामयाब नहीं होगी।
बयान के पीछे संगठन की सोच
JMM का स्पष्ट आरोप है कि निशिकांत दुबे अपने मन से नहीं बोल रहे, बल्कि उनके पीछे भाजपा और RSS की सांप्रदायिक सोच काम कर रही है। ये वही लोग हैं जिनका भारतीय स्वतंत्रता संग्राम से कोई लेना-देना नहीं था, जो राष्ट्रीय ध्वज तक को नहीं अपनाते थे।
सुप्रीम कोर्ट को लेनी चाहिए सख्त कार्रवाई
JMM ने सुप्रीम कोर्ट से स्वत: संज्ञान लेने और निशिकांत दुबे के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। यह मामला सिर्फ एक सांसद का नहीं, बल्कि देश की न्याय व्यवस्था की गरिमा से जुड़ा हुआ है।
लोकतंत्र की रक्षा की जिम्मेदारी हम सबकी
झारखंड मुक्ति मोर्चा ने स्पष्ट कहा है कि वह लोकतंत्र, संविधान और न्यायपालिका की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए हर मंच पर लड़ाई लड़ेगा। भाजपा की संवैधानिक संस्थाओं पर नियंत्रण की नीति देश के लिए खतरे की घंटी है।
