निवास के आधार पर नियुक्ति से इनकार अवैध, हाईकोर्ट ने चौकीदार की नियुक्ति का दिया आदेश
रांची |झारखण्ड उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि केवल बीट के स्थायी निवासी न होने के आधार पर किसी अभ्यर्थी को चौकीदार पद पर नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने गिरिडीह जिले के दीपक दास को नियुक्ति पत्र जारी करने का आदेश दिया है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता शादाब बिन हक ने पक्ष रखा, जबकि राज्य सरकार की ओर से अभिनय कुमार, एसी टू जीए–I ने अदालत में दलीलें प्रस्तुत कीं।
न्यायमूर्ति आनंद सेन की एकलपीठ ने WP(S) No. 7243 of 2025 की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि झारखण्ड चौकीदार कैडर नियमावली, 2015 के अंतर्गत आस-पास के बीट के निवासी भी नियुक्ति के पात्र हो सकते हैं।
याचिकाकर्ता दीपक दास ने सभी आवश्यक परीक्षाएं उत्तीर्ण की थीं और पात्रता को लेकर कोई विवाद नहीं था। इसके बावजूद उन्हें केवल इस आधार पर नियुक्ति नहीं दी गई कि वे संबंधित बीट के स्थायी निवासी नहीं हैं। राज्य सरकार की ओर से भी यही तर्क दिया गया था कि नियमों के अनुसार उसी बीट का स्थायी निवासी होना आवश्यक है।
अदालत ने पूर्व में डिवीजन बेंच द्वारा WP(S) No. 1498 of 2025 एवं इससे संबंधित मामलों में दिए गए निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि निवास के आधार पर आरक्षण या अयोग्यता संविधानसम्मत नहीं है। इसी आलोक में याचिकाकर्ता को अयोग्य ठहराने वाले आदेश को रद्द कर दिया गया।
हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे याचिकाकर्ता को शीघ्र नियुक्ति पत्र जारी करें। इस आदेश के साथ ही याचिका को स्वीकार कर लिया गया।
यह फैसला से राज्य के चौकीदार समेत अन्य पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया में निवास आधारित शर्तों को लेकर एक महत्वपूर्ण नजीर माना जा रहा है।
