हाईकोर्ट का सख्त रुख: पीसीसीएफ की सैलरी रोकने का आदेश
रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने गुरुवार को वन विभाग के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) की सैलरी रोकने का आदेश जारी कर दिया। अदालत ने यह कदम रिटायर्ड रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर शेख अजीतुल्लाह को 13 सालों से लंबित जीपीएफ (GPF) की राशि का भुगतान नहीं होने पर उठाया।
क्या है पूरा मामला?
शेख अजीतुल्ला को वर्ष 2003 में सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। इस फैसले को उन्होंने पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी, जहां से उनका डिसमिसल रद्द कर दिया गया और मामला झारखंड सरकार को सौंपा गया। इसके बाद 2017 में राज्य सरकार ने उन्हें दोबारा 2003 की तारीख से बर्खास्त कर दिया।
पीड़ित ने इसे झारखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी और दलील दी कि वह 2013 में सेवानिवृत्त हो चुके हैं, ऐसे में 2017 में बर्खास्तगी मान्य नहीं हो सकती। अदालत ने उनकी बात मानते हुए डिसमिसल को रद्द कर दिया।
कोर्ट के आदेशों की अनदेखी
इस फैसले के खिलाफ सरकार ने डिवीजन बेंच में अपील की। चीफ जस्टिस की खंडपीठ ने 13 अगस्त 2025 को आदेश दिया कि शेख अजीतुल्लाह की जीपीएफ राशि एक माह में जारी की जाए। लेकिन आदेश के बावजूद भुगतान नहीं हुआ।
17 सितंबर को हुई सुनवाई में सरकार ने एक सप्ताह का समय मांगा। 24 सितंबर को हुई सुनवाई में एक बार फिर 15 दिनों की मोहलत मांगी गई। इसपर कोर्ट ने आज PCCF को हाज़िर होने का आदेश दिया। आज फिर 15 दिनों का समय मांगा गया। इसपर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए नाराज़गी जताई और कहा कि, पीड़ित 13 साल से अपनी जीपीएफ राशि के लिए भटक रहे हैं।
पीसीसीएफ की सैलरी रोकी गई
अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए आदेश दिया कि जब तक शेख अजीतुल्लाह की जीपीएफ राशि जारी नहीं दी जाती, तब तक पीसीसीएफ की सैलरी रोक दी जाए। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता शादाब बिन हक ने पक्ष रखा।
