राज्य सरकार का बड़ा फैसला: अब इंटर की पढ़ाई केवल इंटरमीडिएट कॉलेज और प्लस टू विद्यालयों में, अंगीभूत कॉलेज से अलग की गई व्यवस्था
मुख्य बिंदु:
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वित्त रहित मोर्चा के विरोध के बाद सरकार का अहम निर्णय
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अंगीभूत एवं डिग्री कॉलेजों से इंटर की पढ़ाई अलग
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शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन और अन्य मंत्रियों की उपस्थिति में फैसला
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नई शिक्षा नीति और न्यायालय के निर्देशों के आधार पर लिया गया निर्णय
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इंटर कॉलेजों के हित में बताया गया ‘मील का पत्थर’
सरकार ने बदली इंटर शिक्षा की संरचना
रांची। राज्य सरकार ने आज बड़ा शैक्षणिक फैसला लेते हुए अंगीभूत एवं डिग्री संबंध कॉलेजों से इंटरमीडिएट शिक्षा को पूर्णतः अलग कर दिया है। अब इंटर की पढ़ाई केवल इंटरमीडिएट कॉलेजों और प्लस टू विद्यालयों में ही संचालित की जाएगी। यह निर्णय वित्त रहित मोर्चा के कड़े विरोध और आंदोलन के बाद लिया गया है।
शिक्षा मंत्रियों और सचिवों की मौजूदगी में लिया गया निर्णय
इस अहम बैठक में शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन, मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, मंत्री दीपिका पांडे सिंह, शिक्षा सचिव उमाशंकर सिंह तथा अन्य संबंधित पदाधिकारी मौजूद रहे। बैठक के दौरान सरकार ने स्पष्ट किया कि यह फैसला नई शिक्षा नीति और उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों को ध्यान में रखकर लिया गया है।
वित्त रहित मोर्चा ने दी थी सरकार को चुनौती
गौरतलब है कि वित्त रहित मोर्चा ने लंबे समय से अंगीभूत कॉलेजों में इंटर की पढ़ाई को समाप्त करने की मांग उठाई थी। मोर्चा ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी थी कि अगर इस मुद्दे पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो वे न्यायालय का रुख करेंगे। मोर्चा का तर्क था कि नई शिक्षा नीति के तहत इंटर और डिग्री शिक्षा को स्पष्ट रूप से अलग रखा जाना चाहिए।
छात्रों और इंटर कॉलेजों के लिए बताया गया लाभकारी
वित्त रहित मोर्चा के प्रतिनिधियों मनीष कुमार, अरविंद सिंह और मुरारी प्रसाद सिंह ने सरकार के इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि यह कदम इंटर कॉलेजों के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा। इससे न केवल इंटर शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा बल्कि कॉलेजों की प्रशासनिक व्यवस्था भी अधिक व्यवस्थित होगी।
आगे की जानकारी जल्द
सरकार ने फिलहाल निर्णय की बुनियादी जानकारी साझा की है। विस्तृत दिशा-निर्देश और क्रियान्वयन की प्रक्रिया की जानकारी शीघ्र ही जारी की जाएगी।
