झारखंड- मनरेगा मजदूरी ₹255 से बढ़ाकर ₹405 करने की मांग।

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झारखंड ने केंद्र से की मनरेगा और PM आवास योजना में लंबित भुगतान की माँग: 

मुख्य बिंदु:

  1. मनरेगा के तहत ₹747 करोड़ सामग्री मद और ₹150 करोड़ मजदूरी मद का भुगतान लंबित

  2. 5400 से अधिक कर्मियों का वेतन तीन महीने से अटका

  3. प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) की राशि बढ़ाकर ₹2 लाख करने की माँग

  4. 25,000 राजमिस्त्रियों के प्रशिक्षण के लिए स्वीकृत फंड अब तक जारी नहीं

  5. मनरेगा मजदूरी ₹255 से बढ़ाकर ₹405 करने का आग्रह

  6. SDR दरों में भूगोल के अनुरूप बदलाव की माँग



शिवराज सिंह चौहान से मुख्यमंत्री प्रतिनिधिमंडल की शिष्टाचार भेंट

झारखंड राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली में भारत सरकार के केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान राज्य में केंद्र प्रायोजित योजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़ी जमीनी समस्याओं पर गंभीर चर्चा हुई। विशेष रूप से मनरेगा (MGNREGA) और प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) से संबंधित लंबित मुद्दों को केंद्र के समक्ष जोरशोर से रखा गया।

मनरेगा भुगतान झारखंडप्रधानमंत्री आवास योजना झारखंड
झारखंड ने केंद्र से माँगा ₹747 करोड़

मनरेगा भुगतान और संचालन से जुड़ी गंभीर चिंताएं

₹747 करोड़ सामग्री मद में फंसी राशि

राज्य सरकार की ओर से कृषि मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने केंद्रीय मंत्री से अनुरोध किया कि मनरेगा के सामग्री मद में ₹747 करोड़ की लंबित राशि को जल्द से जल्द राज्य नोडल खाता (SNA) में भेजा जाए। कई कार्यों के लिए Fund Transfer Order (FTO) पहले ही पोर्टल पर अपलोड हो चुके हैं, लेकिन भुगतान अब तक अटका है।

₹150 करोड़ मजदूरी मद में बकाया, श्रमिकों को हो रही परेशानी

राज्य सरकार ने बताया कि लाखों मनरेगा श्रमिकों को समय पर भुगतान नहीं मिल पा रहा है, क्योंकि ₹150 करोड़ की मजदूरी मद में राशि लंबित है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है।

MGNREGA fund Jharkhand
मनरेगा मजदूरों को समय पर भुगतान दिलाएं

प्रशासनिक मद में 3 महीने से वेतन नहीं, 5400 कर्मियों पर असर

मनरेगा की प्रशासनिक मद में फंडिंग रुकने के कारण 5400 से अधिक कर्मचारियों का वेतन और परिचालन व्यय पिछले तीन महीने से अटका हुआ है। इससे योजना का प्रबंधन और निगरानी प्रभावित हो रही है।



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25,000 राजमिस्त्रियों के प्रशिक्षण के लिए स्वीकृति, लेकिन फंड नहीं

झारखंड सरकार को 25,000 अतिरिक्त राजमिस्त्रियों के प्रशिक्षण की स्वीकृति मिली थी, लेकिन इससे संबंधित फंड अभी तक जारी नहीं किया गया है। राज्य सरकार ने तत्काल राशि जारी करने की अपील की है ताकि प्रशिक्षण शुरू किया जा सके।

मजदूरी दर और SDR में बदलाव की माँग

मजदूरी दर ₹255 से बढ़ाकर ₹405 करने की माँग

राज्य सरकार ने बताया कि झारखंड में मनरेगा मजदूरी दर ₹255 प्रतिदिन है, जो देश के कई अन्य राज्यों की तुलना में कम है। राज्य ने इसे ₹405 प्रतिदिन करने की माँग की ताकि मजदूरों को उचित पारिश्रमिक मिल सके और योजना की प्रासंगिकता बनी रहे।

भूगोल आधारित SDR में संशोधन जरूरी

राज्य ने यह भी बताया कि झारखंड का भूगोल, विशेषकर पठारी क्षेत्रों में जल संरक्षण व कुएं की खुदाई जैसे कार्य, अत्यधिक श्रमसाध्य हैं। वर्तमान SDR दरें इस कार्यभार के अनुरूप नहीं हैं। राज्य ने SDR को अन्य पहाड़ी राज्यों की तर्ज़ पर संशोधित करने की माँग की।

FTO और CFP से संबंधित लंबित भुगतान

₹7.06 करोड़ मजदूरी और ₹43 लाख सामग्री मद लंबित

राज्य सरकार ने जानकारी दी कि पिछले एक वर्ष से अधिक समय से कई FTO लंबित हैं। इसमें ₹7.06 करोड़ मजदूरी मद और ₹43 लाख सामग्री मद में फंसी राशि शामिल है, जिससे श्रमिकों और आपूर्तिकर्ताओं को भुगतान नहीं मिल पाया।

CFP योजना में ₹2.86 करोड़ का मानदेय अटका

Community Forest Programme (CFP) के तहत कार्यरत श्रमिकों का ₹2.86 करोड़ मानदेय पिछले तीन महीने से लंबित है। राज्य सरकार ने इस राशि को शीघ्र जारी करने की माँग की ताकि श्रमिकों को राहत मिल सके।

प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण): प्रति इकाई राशि बढ़ाने का आग्रह

झारखंड सरकार की अबुआ आवास योजना में लाभार्थी को ₹2 लाख प्रति इकाई आवंटित किया जाता है। वहीं केंद्र की प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत यह राशि मात्र ₹1.20 लाख है। राज्य सरकार ने इसे अबुआ आवास के अनुरूप करने की माँग की ताकि गरीब परिवारों को मजबूत और गरिमापूर्ण आवास मिल सके।

झारखंड की माँग – केंद्र से शीघ्र निर्णय और सहयोग

राज्य सरकार ने केंद्रीय मंत्री से अनुरोध किया कि सभी लंबित फंड शीघ्र जारी किए जाएं और जरूरी नीति संशोधनों पर त्वरित निर्णय लिया जाए। इन मांगों का उद्देश्य राज्य में ग्रामीण विकास, श्रमिक कल्याण और सामाजिक न्याय को मजबूत करना है।

झारखंड सरकार ने इस बैठक में जो मुद्दे उठाए, वे न केवल योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए अहम हैं, बल्कि वे सीधे गांवों, गरीबों और श्रमिकों के जीवन स्तर को प्रभावित करते हैं। केंद्र सरकार से सहयोग मिलने पर ये योजनाएं अधिक प्रभावी बन सकेंगी और झारखंड की ग्रामीण आबादी को वास्तविक लाभ मिलेगा।

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