जदयू प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से की मुलाकात, सात सूत्री मांग पत्र सौंपा.

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जदयू प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से की मुलाकात, सात सूत्री मांग पत्र सौंपा

रांची, लोकभवन – झारखंड प्रदेश जनता दल (यूनाइटेड) का एक प्रतिनिधिमंडल शनिवार को राज्यपाल संतोष गंगवार से मिला और विभिन्न जन–सरोकार के मुद्दों को लेकर सात सूत्री मांंग पत्र सौंपा। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व पूर्व मंत्री गोपाल कृष्ण पातर उर्फ़ राजा पीटर ने किया। उनके साथ जदयू के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. आफ़ताब जमील, प्रदेश महासचिव भगवान सिंह और प्रदेश प्रवक्ता सागर कुमार भी उपस्थित थे।

जदयू नेताओं ने राज्यपाल से आग्रह किया कि वे मांगे राज्य सरकार के समक्ष रखें, जिस पर राज्यपाल ने सकारात्मक आश्वासन दिया।

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सात सूत्री मांग पत्र में उठाए ये प्रमुख मुद्दे

1. पेसा कानून लागू करने की मांग

प्रतिनिधिमंडल ने आदिवासी-मूलवासी समुदायों के हितों की रक्षा के लिए झारखंड में पेसा कानून लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

2. कानून व्यवस्था पर चिंता

जदयू ने राज्य में लगातार बिगड़ती कानून व्यवस्था को चिंताजनक बताते हुए इस पर तत्काल कार्रवाई की मांग की।

3. तमाड़ प्रखंड में सड़कों के निर्माण की मांग

पिछले 15 वर्षों में तमाड़ प्रखंड के कैनल क्षेत्र की सड़कों का तीन बार शिलान्यास होने के बावजूद निर्माण नहीं हुआ। लगभग 40,000 लोगों को हो रही परेशानी को ध्यान में रखते हुए जल्द सड़क निर्माण कराने की मांग की गई।

4. अवैध लाटरी कारोबार पर रोक की अपील

प्रतिनिधिमंडल ने “डीयर बंगाल”, “डीयर हूगली” और अन्य नामों से चल रहे अवैध लॉटरी कारोबार पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की।

5. अवैध बालू खनन पर सख्ती

जदयू ने कहा कि न्यायालय की रोक के बावजूद राज्य में कई जगह अवैध बालू उत्खनन प्रशासन की मिलीभगत से जारी है। इसे रोकने और राजस्व हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग उठाई गई।

6. मुंडा समुदाय के ख़तियान में सुधार

चुरगी, बारूहातु, तैमारा और गाबेड़ेया पंचायतों के मुंडा समुदाय के खतियान को ऑनलाइन करने में हुई त्रुटियों को ठीक करने की अपील की गई।

7. लोहार/लोहरा समुदाय को एसटी प्रमाण पत्र जारी करने की मांग

जदयू ने कहा कि नोटिफिकेशन में दिए गए नियमों के अनुसार लोहार/लोहरा समुदाय को अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र निर्गत किया जाए।

प्रतिनिधिमंडल ने उम्मीद जताई कि राज्यपाल इन मुद्दों पर कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे ताकि प्रभावित समुदायों और क्षेत्रों को राहत मिल सके।

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