मुख्य बिंदु
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आजसू का आरोप—हेमंत सरकार में विकास की रफ्तार थम गई
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रजत जयंती पर जनता में उत्साह नहीं, शहीदों के सपने अधूरे
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आजसू प्रवक्ताओं ने कहा—झामुमो ने आंदोलन में सौदेबाजी की
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बुनियादी नीतियाँ अब भी अधूरी: आजसू
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राज्य में बेरोजगारी, पलायन, गरीबी बढ़ी: पार्टी
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अफसरशाही और भ्रष्टाचार पर आजसू का गंभीर आरोप
आजसू का प्रेस कॉन्फ्रेंस, सरकार पर तीखे हमले
रांची। झारखंड स्थापना दिवस की रजत जयंती पर आजसू पार्टी ने हेमंत सरकार पर तीखे राजनीतिक हमले किए। पार्टी ने दावा किया कि एनडीए कार्यकाल में विकास की रफ्तार तेज थी, लेकिन पिछले छह वर्षों में राज्य 25 वर्ष पीछे चला गया है। पार्टी के नेताओं का कहना है कि झारखंड आंदोलन जिन सपनों के साथ शुरू हुआ था, वे अब भी अधूरे हैं और रजत जयंती के अवसर पर भी जनता में उत्साह नहीं दिख रहा।
“झामुमो ने आंदोलन में सौदेबाजी की”: आजसू
आजसू के आंदोलनकारी नेताओं—मुख्य प्रवक्ता डॉ. देवशरण भगत, केंद्रीय उपाध्यक्ष प्रवीण प्रभाकर और हसन अंसारी—ने प्रेस वार्ता में राज्य की जनता को रजत जयंती की बधाई दी। उन्होंने कहा कि झारखंड राज्य की नींव आजसू के उग्र आंदोलन ने रखी, जबकि झामुमो ने आंदोलन के दौरान राजनीतिक सौदेबाजी की। मीडिया संयोजक परवाज खान भी कार्यक्रम में उपस्थित थे।
रजत जयंती वर्ष: झारखंड में 15–16 नवंबर को होगा ऐतिहासिक महोत्सव.
बुनियादी नीतियाँ आज भी अधूरी: डॉ. देवशरण भगत
डॉ. भगत ने कहा कि झारखंड में स्थानीय नीति, नियोजन नीति, आरक्षण नीति, विस्थापन नीति और बेरोजगारी उन्मूलन नीति आज भी अधूरी हैं। देश को 40% खनिज राजस्व देने वाले इस राज्य की जनता अब भी बेरोजगारी, गरीबी और पलायन से जूझ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार जन-अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतरी।
“राज्य का विकास ठप, सरकार का रोडमैप गायब”
केंद्रीय उपाध्यक्ष प्रवीण प्रभाकर ने आरोप लगाया कि एनडीए शासन में शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्योग के क्षेत्र में बेहतर पहल हुई थी, परंतु मौजूदा सरकार के पास विकास का कोई स्पष्ट रोडमैप नहीं है। उन्होंने बताया—
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राष्ट्रीय गरीबी दर: 22% | झारखंड: 39%
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राष्ट्रीय साक्षरता: 77.7% | झारखंड: 66.41%
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कक्षा 10 तक ड्रॉपआउट: 35%
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कुपोषण दर: 19.6%
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10,000 की आबादी पर चिकित्सक: राष्ट्रीय औसत 9 | झारखंड में 3.5
उन्होंने कहा कि सरकार ने 5 लाख नौकरियों की घोषणा की थी, लेकिन 1 लाख भी नहीं दी गई।
“आंदोलनकारियों के साथ धोखा, अफसरशाही हावी”
केंद्रीय उपाध्यक्ष हसन अंसारी ने कहा कि आंदोलनकारियों की पहचान और चिन्हितिकरण अब भी पूरा नहीं हुआ है। आंदोलनकारी आयोग भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुका है। उन्होंने कहा कि—
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म्यूटेशन से लेकर विभागीय कामों तक भ्रष्टाचार चरम पर
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हर थाने और पोस्टिंग की कीमत तय
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अवैध कोयला कारोबार, वसूली और अपराध बढ़े
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सरकार इन मुद्दों पर मौन
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियाँ जनहित से अधिक नौकरशाहों और विधायकों के हित में झुकी हुई हैं। जनता अब जवाब मांग रही है।
