Urdu TET Jharkhand

आलिम–फ़ाज़िल डिग्री विवाद पर बवाल, उर्दू शिक्षक संघ ने उठाई आवाज़.

झारखंड/बिहार रोज़गार समाचार

प्रमुख बिंदु

  • उर्दू शिक्षक संघ ने सीएम और मंत्रियों को सौंपा मांग पत्र

  • आलिम व फ़ाज़िल डिग्रियों को मान्यता न देने पर आपत्ति

  • 2006 से राज्य स्तर पर डिग्री मान्य, फिर भी विवाद जारी

  • JSSC ने काउंसलिंग कराई, लेकिन फाइनल सूची नहीं जारी

  • संघ ने चेताया—जल्द समाधान न हुआ तो होगा आंदोलन

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रांची, 23 सितम्बर 2025- झारखंड राज्य उर्दू शिक्षक संघ ने उर्दू टेट (6–8) सफल अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रक्रिया में हो रही देरी और बाधाओं को लेकर सरकार के खिलाफ आवाज़ तेज कर दी है। संघ के केंद्रीय महासचिव अमीन अहमद के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री, संबंधित मंत्रियों और विभागीय अधिकारियों को मांग पत्र सौंपकर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई।

अमीन अहमद ने आरोप लगाया कि झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) ने आलिम और फ़ाज़िल डिग्रियों पर विधि विभाग से राय मांगी थी, जिस पर विभाग ने इसे असंवैधानिक ठहरा दिया। उन्होंने इसे “ग़लत और भ्रामक” करार देते हुए कहा कि यह निर्णय अल्पसंख्यक समुदाय के योग्य अभ्यर्थियों के साथ अन्याय है।

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उन्होंने स्पष्ट किया कि झारखंड अधिविद्य परिषद (JAC) ने 2006 में ही अधिसूचना जारी कर आलिम और फ़ाज़िल डिग्रियों को मान्यता प्रदान की थी। यह परीक्षाएँ राज्य सरकार की देखरेख में आयोजित होती हैं। ऐसे में सरकार का ही विधि विभाग इस पर आपत्ति जताए, यह विरोधाभासी और दुर्भाग्यपूर्ण है।

संघ ने यह भी याद दिलाया कि 19 अप्रैल 2023 की अधिसूचना में JSSC पहले ही आलिम और फ़ाज़िल डिग्रीधारी अभ्यर्थियों को स्नातक प्रशिक्षित उर्दू शिक्षक पदों पर नियुक्त कर चुका है। बावजूद इसके, इस बार उर्दू टेट (6–8) की काउंसलिंग पूरी होने के बाद भी फाइनल सूची रोक दी गई है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि मौलवी परीक्षा के बाद स्नातक अनिवार्य है, जबकि संघ का कहना है कि यह तर्क पूरी तरह निराधार और 2006 की अधिसूचना का उल्लंघन है।

अमीन अहमद ने आरोप लगाया कि यह पूरा मामला अल्पसंख्यक समुदाय के योग्य युवाओं को नियोजन से वंचित करने का प्रयास है। उन्होंने मांग रखी कि 2006 की अधिसूचना का पालन सुनिश्चित किया जाए, काउंसलिंग के बाद फाइनल सूची शीघ्र जारी हो, और विधि विभाग व JSSC की असंवैधानिक व्याख्या वापस ली जाए।

संघ के केंद्रीय पदाधिकारियों एनामुल हक़, शाहिद अनवर, मो० फखरुद्दीन और शहज़ाद अनवर ने इस पूरे अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं, केंद्रीय महासचिव अमीन अहमद और प्रवक्ता शहज़ाद अनवर ने चेतावनी दी कि यदि जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो संघ आंदोलनात्मक रुख अपनाने को बाध्य होगा।

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