एमिटी यूनिवर्सिटी झारखंड

एमिटी यूनिवर्सिटी झारखंड ने दिया क्वांटम तकनीक की पढ़ाई को नया आयाम.

झारखंड/बिहार रोज़गार समाचार

एमिटी यूनिवर्सिटी झारखंड में क्वांटम कंप्यूटिंग पर 6-दिवसीय ऑनलाइन फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम संपन्न

एआईसीटीई अटल अकादमी के सहयोग से “नेक्स्टजेन क्वांटम एजुकेटर्स प्रोग्राम” का आयोजन

रांची, 30 अगस्त 2025: एमिटी इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (AIIT), एमिटी यूनिवर्सिटी झारखंड ने अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) अटल अकादमी के सहयोग से 25 से 30 अगस्त तक ‘नेक्स्टजेन क्वांटम एजुकेटर्स प्रोग्राम – क्वांटम कंप्यूटिंग एंड टेक्नोलॉजी (बेसिक)’ विषय पर छह दिवसीय ऑनलाइन फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (FDP) का सफल आयोजन किया।

कुलपति का संदेश

एमिटी यूनिवर्सिटी झारखंड के कुलपति डॉ. अशोक के. श्रीवास्तव ने कार्यक्रम की सफलता पर अपनी शुभकामनाएं दीं और कहा कि यह पहल भविष्य के शिक्षकों और शोधकर्ताओं को नई दिशा प्रदान करेगी।

कार्यक्रम का उद्देश्य

इस FDP का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को क्वांटम कंप्यूटिंग के मूलभूत ज्ञान और व्यावहारिक कौशल से लैस करना था। क्वांटम तकनीक क्रिप्टोग्राफी, मशीन लर्निंग और उन्नत कंप्यूटिंग फ्रेमवर्क जैसे कई क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव लाने की क्षमता रखती है।

विशेषज्ञों के व्याख्यान

कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को देश-विदेश के विशेषज्ञों ने संबोधित किया, जिनमें शामिल रहे:

  • प्रो. दीपन कुमार घोष, भौतिकी विभाग, IIT मुंबई (सेवानिवृत्त)

  • सुश्री निवेदिता डे, PwC, प्रौद्योगिकी प्रबंधन

  • डॉ. अजय रॉय, बिशा यूनिवर्सिटी, सऊदी अरब

  • डॉ. शुभंकर, NIT मेघालय

  • डॉ. सुत्रिप्तो मजूमदार, येयुंगनाम यूनिवर्सिटी, दक्षिण कोरिया

  • डॉ. एस.के. वार्ष्णेय, पूर्व सलाहकार एवं प्रमुख, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग, DST, भारत सरकार

  • डॉ. एल. वेंकट सुब्रमण्यम, IBM Quantum इंडिया लीडर

  • प्रो. एन.आर. रॉय, प्रोफेसर (सेवानिवृत्त), भौतिकी विभाग, रांची विश्वविद्यालय

  • प्रो. एम.के. सिंह, प्रोफेसर (सेवानिवृत्त), गणित विभाग, रांची विश्वविद्यालय

  • डॉ. कुंतल मुखर्जी, BIT मेसरा

समन्वयन और निष्कर्ष

इस FDP का सफल समन्वयन डॉ. पूजा झा, एसोसिएट प्रोफेसर, AIIT द्वारा किया गया। प्रतिभागियों ने कार्यक्रम को अत्यंत उपयोगी और ज्ञानवर्धक बताया।

एमिटी यूनिवर्सिटी झारखंड का यह प्रयास क्वांटम तकनीक जैसे उभरते क्षेत्र में शिक्षा और अनुसंधान को नई ऊंचाई पर ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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