अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस पर संगठनों का प्रदर्शन, आदिवासियों पर हिंसा और फर्जी मामलों पर उठी आवाज़
रांची। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस के मौके पर 10 दिसंबर 2025 को राजधानी रांची के अल्बर्ट एक्का चौक में कई जन संगठनों ने राज्य और केंद्र सरकार पर मानवाधिकार उल्लंघन के गंभीर आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया। झारखंड जनअधिकार महासभा, पीयूसीएल, आदिवासी विमेंस नेटवर्क, AIPWA समेत अन्य संगठनों के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में शामिल हुए।
आदिवासियों पर हिंसा, कैंप स्थापना और खनन को लेकर नाराज़गी
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि नक्सली के नाम पर लगातार निर्दोष आदिवासियों के खिलाफ हिंसा हो रही है। इसके साथ ही बिना ग्रामसभा की सहमति के सुरक्षा बलों के कैंप लगाने पर भी गंभीर आपत्ति जताई गई। संगठनों ने कहा कि जबरन खनन और बढ़ते विस्थापन से आदिवासी समुदाय अपने ही संसाधनों से दूर होता जा रहा है।

UAPA के दुरुपयोग और विचाराधीन कैदियों की रिहाई की मांग
इसके अलावा प्रदर्शनकारियों ने UAPA के तहत झूठे और फर्जी मामलों के दर्ज होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कई लोग वर्षों से विचाराधीन कैदियों के रूप में जेलों में बंद हैं, जिनकी जल्द सुनवाई और रिहाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
संगठनों ने उमर खालिद, शरजील इमाम और सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी और कथित प्रताड़ना का मुद्दा भी उठाया और इन मामलों में पारदर्शी जांच की मांग की।
महिलाओं के अधिकारों के उल्लंघन पर भी चिंता व्यक्त
इसके साथ ही महिला अधिकारों के लगातार हो रहे उल्लंघन को लेकर भी संगठनों ने चिंता जाहिर की। प्रतिनिधियों ने कहा कि राज्य में महिलाओं की सुरक्षा और न्याय व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता है, लेकिन इसके बजाय असहमति की आवाज़ों पर कार्रवाई की जा रही है।
कई संगठनों के प्रतिनिधियों ने लिया हिस्सा
प्रदर्शन में आकांक्षा बिहान, अलोका कुजूर, सिसिलिया लकड़ा, आशीष रौशन, लीना, नदीम, नंदिता, रिया तुलिका पिंगुआ, रोज़ मधु तिर्की, रौशन होरा, सिराज दत्ता, शशि, टॉम, ज़ियाउल्ला सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता और संगठन के सदस्य शामिल हुए।
प्रतिनिधियों ने तख्तियों, नारों और सामूहिक मांगों के जरिए मानवाधिकार उल्लंघनों के खिलाफ आवाज़ बुलंद की।
