मुख्य बिंदु:
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झारखंड में पंचायत सहायकों को महीनों से मानदेय नहीं मिला
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17,380 पंचायत सहायकों की माली हालत बेहद खराब
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विभाग ने राशि जारी की, फिर भी प्रखंड स्तर पर भुगतान अटका
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संघ अध्यक्ष चंद्रदीप कुमार बोले — “2500 रुपये में घर कैसे चले?”
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आंदोलन की चेतावनी — “अब सड़क से सदन तक होगी लड़ाई”
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रांची, 14 अक्टूबर 2025- झारखंड के पंचायत सहायकों की आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। राज्य स्तरीय पंचायत सहायक संघ के अध्यक्ष चंद्रदीप कुमार ने कहा कि “अब हालत इतनी दयनीय हो चुकी है कि दुर्गा पूजा बीत गई और मानदेय का इंतज़ार अब दिवाली और छठ तक खिंच गया है।” उन्होंने बताया कि राज्य भर में करीब 17,380 पंचायत सहायक सदस्य हैं जो नियमित रूप से सरकार के काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें महीनों से मानदेय नहीं मिला है।
विभाग ने राशि दी, भुगतान प्रखंड स्तर पर अटका
संघ अध्यक्ष के अनुसार, पंचायती राज विभाग ने छह महीने का आवंटन सभी जिलों को पहले ही भेज दिया था, ताकि दुर्गा पूजा से पहले पंचायत सहायकों को भुगतान किया जा सके। लेकिन, प्रखंड स्तर पर अधिकारियों के “ढुलमुल रवैये” के कारण स्थिति जस की तस बनी हुई है।
उन्होंने कहा, “कहीं तीन महीने का भुगतान नहीं हुआ, कहीं एक साल से राशि लंबित है। किसी को एक महीने का भुगतान मिला, किसी को दो महीने का — कहीं कुछ भी नियमित नहीं है।”
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“बच्चों की फीस भरने के लिए उधार लेना पड़ रहा”
चंद्रदीप कुमार ने बताया कि पंचायत सहायकों की हालत अब इतनी खराब हो गई है कि बच्चों की स्कूल फीस तक देने के लिए उधार लेना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि राशन दुकानदारों ने भी अब उधार देना बंद कर दिया है।
विभाग की ओर से पहले जनवरी से मार्च तक का भुगतान भेजा गया था, और अब अप्रैल से सितंबर तक की राशि भी सभी जिलों को आवंटित कर दी गई है। फिर भी, जमीनी स्तर पर भुगतान नहीं हुआ है।
“विभाग और अधिकारियों ने किया निर्देशों का पालन नहीं”
संघ अध्यक्ष ने कहा कि वे कई बार इस विषय में पंचायती राज विभाग के निदेशक और प्रधान सचिव से मुलाकात कर चुके हैं और लिखित आवेदन भी दिया है, लेकिन विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने सवाल उठाया — “जो पदाधिकारी विभाग के निर्देशों का पालन नहीं कर रहे, उन पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?”
“2500 रुपये में घर कैसे चले?”
चंद्रदीप कुमार ने कहा कि पंचायत सहायकों को सिर्फ ₹2500 का मानदेय दिया जाता है, जो आज के समय में परिवार चलाने के लिए बिल्कुल अपर्याप्त है। उन्होंने सरकार से मांग की कि “कम से कम काम का सम्मानजनक वेतन दिया जाए।”
उन्होंने कहा, “ऐसी नौकरी से क्या फायदा, जिसमें दो वक्त की रोटी भी नसीब न हो सके। त्योहार फीके पड़ रहे हैं और कर्मचारी निराश हैं।”
आंदोलन की चेतावनी
संघ अध्यक्ष ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि शीघ्र भुगतान नहीं हुआ तो पंचायत सहायक संघ सरकार के खिलाफ सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन करेगा। उन्होंने कहा, “इस सरकार में बिना आंदोलन के कुछ नहीं मिलता। अब सभी पंचायत सहायकों को फिर से गोलबंद किया जा रहा है। आंदोलन ही अब एकमात्र रास्ता है।”
राज्य भर के पंचायत सहायकों की यह स्थिति सरकार और प्रशासनिक व्यवस्था दोनों पर गंभीर सवाल उठाती है। विभागीय राशि उपलब्ध होने के बावजूद भुगतान न होना सिस्टम की खामी को उजागर करता है। यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में पंचायत सहायकों का आंदोलन झारखंड सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
