हेमंत-कल्पना की जोड़ी ने आदिवासी सीटों में बीजेपी को दी पटखनी।

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अनुसूचित जनजाति की सीटों पर बीजेपी का खराब प्रदर्शन

झारखंड की 81 विधानसभा सीटों में से 37 सीटें अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित हैं। इनमें 28 सीटें आदिवासी वर्ग के लिए हैं, जिन पर भाजपा गठबंधन को करारी हार का सामना करना पड़ा। भाजपा इन 28 सीटों में से केवल सरायकेला सीट पर ही जीत दर्ज कर पाई।

सरायकेला में जीत: पूर्व मुख्यमंत्री का योगदान

सरायकेला सीट पर बीजेपी की जीत पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन के प्रयासों से संभव हुई, जो झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे।

एसटी वर्ग की अन्य सीटों पर बीजेपी का सूपड़ा साफ

28 आरक्षित सीटों में से सरायकेला को छोड़कर, भाजपा बरहेट, बोरियो, महेशपुर, दुमका, घाटशिला, पोटका, चाईबासा, मझगांव, मनोहरपुर, खरसावां, तमाड़, तोरपा, गुमला, चक्रधरपुर, खुंटी, सिसई, बिशुनपुर, जगन्नाथपुर, लिट्टीपाड़ा, शिकारीपाड़ा, जामा, खिजरी, मांडर, सिमडेगा, कोलेबिरा, लोहरदगा, और मनिका सीटों पर हार गई।

बाबूलाल मरांडी भी नहीं दिला सके जीत

आदिवासी समाज से आने वाले भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी सामान्य सीट से चुनाव लड़े, लेकिन पार्टी का प्रदर्शन आदिवासी आरक्षित सीटों पर बेहद खराब रहा।

हेमंत-कल्पना की जोड़ी ने दी कड़ी शिकस्त

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी जोड़ीदार कल्पना सोरेन की रणनीति ने भाजपा को जोरदार शिकस्त दी। आदिवासी वर्ग का विश्वास हासिल करने के भाजपा के सभी प्रयास विफल रहे।

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