Garhwa Bypass Inauguration

गढ़वा को मिली बड़ी सौगात, सालों की मेहनत लाई रंग.

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गढ़वा बाईपास का उद्घाटन: वर्षों के संघर्ष की ऐतिहासिक जीत

मुख्य बिंदु:

  • गढ़वा बाईपास का लोकार्पण, वर्षों के संघर्ष का परिणाम

  • ट्रैफिक जाम, दुर्घटनाओं और एंबुलेंस बाधाओं से मिली राहत

  • पूर्व मंत्री मिथिलेश ठाकुर ने 2020 में गडकरी को लिखा था विस्तृत पत्र

  • कब्रिस्तान विवाद के समाधान में बना ओवरब्रिज

  • यह किसी नेता की नहीं, गढ़वा की जनता की जीत है

  • मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का सहयोग अहम रहा



शुभ दिन, ऐतिहासिक शुरुआत

आज का दिन गढ़वा के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज होने वाला दिन है। गढ़वा बाईपास, जो केवल एक सड़क नहीं बल्कि जनसंघर्ष की लंबी दास्तान है, आज जनता को समर्पित किया जा रहा है। झारखंड के पूर्व मंत्री मिथिलेश ठाकुर ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस भावुक क्षण को याद किया और इसके पीछे की पूरी कहानी साझा की।

यह सिर्फ एक सड़क नहीं, जनसंघर्ष की प्रतीक है

गढ़वा बाईपास वर्षों की तकलीफ, रोजाना की परेशानी और दुर्घटनाओं का प्रत्यक्ष जवाब है। दमघोंटू जाम, समय पर अस्पताल न पहुंच पाने वाले मरीज, स्कूल जाते बच्चों की मुश्किलें और भारी वाहनों की धमक—इन सभी ने इसे गढ़वा की सबसे प्राथमिक जरूरत बना दिया था।

संकल्प से शुरुआत: 2020 में लिखा गया था गडकरी को पत्र

मिथिलेश ठाकुर ने बताया कि 2019 में जनप्रतिनिधि चुने जाने के बाद उन्होंने इसे अपना संकल्प बनाया। 27 अप्रैल 2020 को उन्होंने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को एक विस्तृत पत्र लिखा जिसमें रेहला से गढ़वा तक एनएच-75 पर व्यवस्थित बाईपास और जरूरत के अनुसार फ्लाईओवर बनाने का सुझाव दिया गया था।

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गडकरी ने पत्र का संज्ञान लिया और कार्रवाई का आश्वासन दिया। हालांकि 2019 में इस परियोजना का शिलान्यास कर दिया गया था, लेकिन तब तक न तो इसका वित्तीय अनुमोदन हुआ था और न ही योजना को स्वीकृति मिली थी।

दिल्ली से फॉलोअप, बैठकों में भागीदारी और ज़मीनी प्रयास

इसके बाद ठाकुर ने दिल्ली जाकर मंत्रालय और अधिकारियों से लगातार संपर्क बनाए रखा। कई बैठकों में भाग लिया और फाइलों की स्थिति जानकर उन्हें आगे बढ़ाया। अंततः योजना को स्वीकृति मिली, टेंडर हुआ और निर्माण कार्य शुरू हुआ। इस दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का मार्गदर्शन और सहयोग लगातार मिलता रहा।

अड़चनों से जूझते हुए बना कब्रिस्तान पर ओवरब्रिज

निर्माण कार्य के दौरान अचला नवाडीह स्थित कब्रिस्तान में बाधा आने पर कार्य रुक गया। इस समस्या को लेकर मिथिलेश ठाकुर ने दोबारा गडकरी से संपर्क किया। जनता की भावना और धार्मिक आस्था का सम्मान करते हुए वहां ओवरब्रिज बनाने का फैसला लिया गया और निर्माण फिर से आरंभ हुआ।

टीमवर्क, प्रतिबद्धता और राजनीतिक इच्छाशक्ति की जीत

आज बाईपास का उद्घाटन हो रहा है, यह किसी एक पार्टी या नेता की नहीं बल्कि गढ़वा की जनता की सामूहिक जीत है। वर्षों की मेहनत, संवाद, संघर्ष और राजनीतिक इच्छाशक्ति का परिणाम है यह ऐतिहासिक सफलता। मिथिलेश ठाकुर ने खुद को इस उद्घाटन के मंच पर भले न बताया हो, लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट किया कि वे हर उस दस्तावेज में मौजूद हैं जो इस कार्य की नींव बना।

जनता के लिए, दिखावे के लिए नहीं

ठाकुर ने भावुक अंदाज़ में लिखा, “मैं उद्घाटन की भीड़ में नहीं हूं, लेकिन जनता के आशीर्वाद में हूं। मैंने यह काम सत्ता के दिखावे के लिए नहीं बल्कि गढ़वा की जनता के अधिकार और जरूरत के लिए किया।”

नितिन गडकरी और हेमंत सोरेन को धन्यवाद

पूर्व मंत्री ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए दिल से आभार जताया। उन्होंने लिखा कि यह सड़क केवल रास्ता नहीं, बल्कि यह विकास की धारा, राहत की सांस और संघर्ष का सम्मान है।

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