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“निलंबन से सेवा विस्तार तक… पूरा खेल क्या है?”—मरांडी का बड़ा सवाल.

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बाबूलाल मरांडी का हेमंत सरकार पर बड़ा हमला: “अवैध डीजीपी अनुराग गुप्ता के पीछे बड़े रहस्य छिपे हैं”

मुख्य बिंदु-

• बाबूलाल मरांडी का हेमंत सरकार पर तीखा हमला
• पूर्व डीजीपी अनुराग गुप्ता की नियुक्ति पर गंभीर सवाल
• वसूली, तस्करी, उत्खनन और रंगदारी के आरोप
• शराब घोटाला और कफ सिरप तस्करी का मुद्दा
• “सीएम संरक्षण न होता तो जांच अब तक शुरू हो चुकी होती”


मरांडी का सवाल: “निलंबन से सेवा विस्तार तक पूरा खेल क्या है?”

रांची- भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने झारखंड सरकार और पूर्व डीजीपी अनुराग गुप्ता पर फिर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जनता यह जानना चाहती है कि निलंबन से लेकर डीजीपी पद और सेवा विस्तार तक यह सब कैसे हुआ?

“सीएम के संरक्षण में वसूली सिंडिकेट चलता रहा”

मरांडी ने कहा कि अनुराग गुप्ता ने वसूली के लिए इंस्पेक्टर गणेश सिंह, सिपाही रंजीत राणा, मनोज गुप्ता और हरियाणा के किशन जी जैसे लोगों को सक्रिय किया और आज तक किसी पर कार्रवाई नहीं हुई।

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“शराब घोटाले पर आगाह किया, पर सीएम ने अनसुना किया”

उन्होंने कहा कि शराब घोटाले की चेतावनी पहले ही दे दी गई थी, लेकिन मुख्यमंत्री ने इसे अनदेखा किया। बाद में सीबीआई की कार्रवाई हुई और IAS विनय चौबे गिरफ्तार हुए।

“90 दिनों तक चार्जशीट नहीं—सरकार ने खुद जमानत का रास्ता खोला”

मरांडी बोले कि मामले को दबाने के लिए जानबूझकर चार्जशीट देर से दाखिल की गई।

“अवैध कफ सिरप से बच्चों की जान खतरे में डाली गई”

मरांडी ने कहा कि गुजरात की टीम ने जब कार्रवाई की, तब अनुराग गुप्ता ने सीआईडी जांच का बहाना बनाकर अपराधियों को बचाने की कोशिश की।

“सीआईडी से हटते ही रातों-रात दस्तावेज गायब किए”

उनका आरोप है कि पद से हटने की रात अनुराग गुप्ता दफ्तर से कागजात और डिजिटल डेटा हटाते रहे और बाद में मुख्यमंत्री को धमकाने की कोशिश की।

“गोपनीय शाखा अपराधियों की बैठक का केंद्र बनी”

मरांडी ने कहा कि सुजीत सिन्हा और राजेश राम जैसे अपराधियों से मिलकर वसूली की व्यवस्था की गई।

“जांच नहीं होने का अर्थ साफ—मामला हिस्सेदारी का है”

उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी घटनाओं के बावजूद जांच न होना बताता है कि यह मामला सीधा लेन-देन से जुड़ा हुआ है।

“कुछ अधिकारी सरकार के टूलकिट बन गए हैं”

मरांडी ने अधिकारियों को चेतावनी दी कि जनहित में न चलने पर भविष्य में मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

“भस्मासुर को दिया वरदान—अब सीएम खुद फंस गए”

व्यंग्य करते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री चाहें तो अनुराग गुप्ता को अपना सलाहकार बना लें ताकि भविष्य में सुरक्षित रहें।

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