सिरमटोली रैंप से लेकर मरांग बुरू तक। आदिवासी स्थलों की रक्षा को लेकर उग्र हुआ आंदोलन.

झारखंड/बिहार विधानसभा चुनाव

🔴 प्रमुख बिंदु :

  • झारखंड बंद में केन्द्रीय सरना समिति और चडरी सरना समिति के कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे

  • सिरमटोली रैंप विवाद, धार्मिक स्थलों की रक्षा सहित कई मुद्दों पर बंद

  • बबलू मुंडा ने हेमंत सरकार को आदिवासी विरोधी करार दिया

  • अल्बर्ट एक्का चौक पर धरना, कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी हुई

  • मुख्य पहान ने कहा – संस्कृति और परंपरा खत्म हुई तो आदिवासी समाज भी खत्म हो जाएगा



रांची | 04 जून 2025
झारखंड में मंगलवार को विभिन्न आदिवासी संगठनों द्वारा आयोजित संपूर्ण झारखंड बंद का व्यापक असर देखा गया। केंद्रीय सरना समिति और चडरी सरना समिति के सैकड़ों कार्यकर्ता केंद्रीय अध्यक्ष बबलू मुंडा और मुख्य पहान जगलाल पहान के नेतृत्व में सुबह से ही रांची की सड़कों पर उतरे।

बंद की शुरुआत केंद्रीय कार्यालय (लाइन टैंक रोड, PWD क्वार्टर) से हुई, जो चडरी होते हुए एचबी रोड और फिर अल्बर्ट एक्का चौक तक पहुंचा। यहां कार्यकर्ताओं ने दुकानदारों से शांतिपूर्वक बंद की अपील की और धरने के रूप में सड़क पर बैठ गए। इस दौरान पुलिस प्रशासन ने सभी प्रमुख बंद समर्थकों को हिरासत में ले लिया।

🔥 बबलू मुंडा का तीखा हमला

केंद्रीय अध्यक्ष बबलू मुंडा ने कहा,

“झारखंड में अब ‘अबुआ सरकार’ नहीं बल्कि ‘बबुआ सरकार’ है। हेमंत सोरेन सरकार ने साढ़े पांच साल में आदिवासी समाज को गर्त में ढकेलने का काम किया है।”

उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन आदिवासी विरोधी हैं, और लगातार आदिवासियों की धर्म, संस्कृति, रीति-रिवाज और परंपराओं को खत्म करने की ओर बढ़ रहे हैं।

📌 क्यों बुलाया गया झारखंड बंद?

आदिवासी संगठनों ने निम्नलिखित मुद्दों पर झारखंड बंद किया:

  • सिरमटोली फ्लाईओवर रैंप पर धार्मिक स्थल को बचाने की मांग

  • मरांग बुरू (परसनाथ), लुगु बुरू, मुधर हिल्स, दिउरी दिरी, महदानी सरना स्थल की रक्षा

  • आदिवासी अस्मिता, जमीन, संस्कृति और धार्मिक स्थलों पर कथित हमले

🗣 मुख्य पहान जगलाल पहान बोले:

“जिस दिन हमारी संस्कृति और परंपरा खत्म होगी, उसी दिन आदिवासी समाज भी खत्म हो जाएगा।”

🧑‍🤝‍🧑 प्रमुख लोग रहे शामिल:

इस आंदोलन में बबलू मुंडा, जगलाल पहान, महासचिव महादेव टोप्पो, सुरेंद्र लिंडा, कुमोद वर्मा, अमर उरांव, चीकू लिंडा, मुन्ना हेमरोम, विशाल मुंडा सहित दर्जनों आदिवासी नेता और कार्यकर्ता शामिल रहे।

इस झारखंड बंद ने यह स्पष्ट किया कि आदिवासी संगठन अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। सरकार को सिरमटोली जैसे विवादों पर संवेदनशीलता दिखानी होगी, अन्यथा जन आक्रोश और तेज़ हो सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *