पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की जयंती: जननेता को श्रद्धांजलि।

झारखंड/बिहार राष्ट्रीय ख़बर विधानसभा चुनाव

🔹 मुख्य बिंदु-

  1. आज 17 अप्रैल को चंद्रशेखर की जयंती मनाई जा रही है

  2. वे भारत के 8वें प्रधानमंत्री और समाजवादी विचारधारा के प्रतीक थे

  3. चंद्रशेखर को “युवाओं के नेता” और “जेल यात्रा करने वाले सत्याग्रही” के रूप में जाना गया

  4. उनका राजनीतिक जीवन असहमतियों के बावजूद सिद्धांतों से समझौता न करने के लिए प्रसिद्ध रहा

  5. भारत की राजनीति में उनका योगदान आज भी प्रासंगिक बना हुआ है



🟨 चंद्रशेखर: एक संघर्षशील नेता की पहचान

पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर का जन्म 17 अप्रैल 1927 को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के इब्राहिमपट्टी गांव में हुआ था। एक किसान परिवार से आने वाले चंद्रशेखर ने साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा मुकाम हासिल किया। उन्होंने भारतीय राजनीति को एक नयी दिशा दी और समाजवाद को व्यवहारिक जमीन पर उतारने का प्रयास किया।

Chandra Shekhar JayantiChandra Shekhar biography in Hindi
पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की जयंती

🟨 राजनीतिक सफर: कांग्रेस से अलग राह तक

चंद्रशेखर ने अपने करियर की शुरुआत कांग्रेस पार्टी से की, लेकिन 1970 के दशक में उन्होंने तत्कालीन नीतियों के विरोध में आवाज़ उठाई। वे कांग्रेस छोड़कर विपक्ष की राजनीति में आए और बाद में जनता पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल हुए। 1983 में उन्होंने “समाजवादी जनता पार्टी” बनाई।

🟨 1990-91: प्रधानमंत्री बनने की संक्षिप्त अवधि

चंद्रशेखर भारत के प्रधानमंत्री केवल आठ महीनों तक (10 नवंबर 1990 से 21 जून 1991) रहे। इस अल्पकाल में उन्होंने आर्थिक संकट के समय देश का नेतृत्व किया। देश को डिफॉल्ट से बचाने के लिए उन्होंने गोल्ड रिजर्व गिरवी रखने जैसे कठिन निर्णय लिए। यह वह समय था जब भारत गंभीर विदेशी मुद्रा संकट से जूझ रहा था।

🟨 सिद्धांतों पर अडिग रहे चंद्रशेखर

चंद्रशेखर का राजनीतिक जीवन उनके सिद्धांतों और वैचारिक प्रतिबद्धताओं के लिए जाना जाता है। उन्होंने प्रधानमंत्री रहते हुए भी अपने विचारों से समझौता नहीं किया। संसद में उनके भाषणों को आज भी गहराई और राष्ट्रभक्ति की मिसाल माना जाता है।

🟨 ‘पदयात्रा’ से जुड़े रहे जनमानस से

1983 में चंद्रशेखर ने कन्याकुमारी से दिल्ली तक 4260 किलोमीटर की पदयात्रा की थी, जिसका उद्देश्य जनता से सीधा संवाद करना था। इस ऐतिहासिक पदयात्रा ने उन्हें ‘जननेता’ के रूप में स्थापित कर दिया।

🟨 उनकी विरासत आज भी जीवंत

चंद्रशेखर की जयंती पर उन्हें याद करना केवल अतीत को सम्मान देना नहीं है, बल्कि उनके विचारों को पुनः जीवंत करना है। उनके जैसे नेता, जो सिद्धांतों के लिए कुर्सी छोड़ सकते हैं, आज की राजनीति में मिसाल हैं।

🔹 निष्कर्ष

चंद्रशेखर का जीवन हमें बताता है कि राजनीति केवल सत्ता का खेल नहीं, बल्कि सेवा और सिद्धांतों का मंच भी है। उनकी जयंती पर देश को एक बार फिर से विचार करना चाहिए कि कैसे सादा जीवन और ऊँचे विचार आज भी राजनीति में मार्गदर्शक बन सकते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *