आरकेडीएफ विश्वविद्यालय रांची में झारखंडी फूड फेस्टिवल का आयोजन, पारंपरिक व्यंजनों ने लोगों का मन जीता
मुख्य बिंदु-
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झारखंड के 25वें स्थापना दिवस पर फूड फेस्टिवल का आयोजन
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होटल मैनेजमेंट के छात्रों ने झारखंडी व्यंजनों की प्रदर्शनी लगाई
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महुआ लड्डू, धुस्का, गुलगुला, देहाती मुर्गी सहित कई पकवान आकर्षण बने
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शिक्षक, छात्र और कर्मचारियों ने पूरे उत्साह से लिया हिस्सा
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कुलपति और कुलसचिव ने पारंपरिक व्यंजनों के संरक्षण पर दिया जोर
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झारखंडी व्यंजनों से सजा फूड फेस्टिवल
रांची- RKDF विश्वविद्यालय के रांची कैंपस में झारखंड के 25वें स्थापना दिवस के अवसर पर झारखंडी फूड फेस्टिवल का आयोजन किया गया। इस आयोजन में होटल मैनेजमेंट विभाग के छात्र-छात्राओं ने राज्य के पारंपरिक और लोकप्रिय व्यंजनों की शानदार प्रदर्शनी लगाई। फेस्टिवल में झारखंड की समृद्ध पाक परंपरा को बेहतरीन तरीके से पेश किया गया, जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा।
महुआ लड्डू से लेकर इमली की चटनी तक—झारखंड का असली स्वाद
कार्यक्रम में महुआ लड्डू, इमली की चटनी, धनिया की चटनी, मुरी के लड्डू, गुलगुला, मटर की सब्जी और अरबी के पत्तों से बने विभिन्न व्यंजनों का स्वाद लोगों ने चाव से लिया। इन पकवानों ने दिखाया कि झारखंड की रसोई कितना विविध और स्वादिष्ट है। छात्रों ने पारंपरिक रेसिपियों को आधुनिक प्रस्तुति के साथ पेश किया, जिसे देखकर सभी उत्साहित दिखे।

धुस्का, कासी मांस और देहाती चिकन बने आकर्षण का केंद्र
फेस्टिवल में चावल के आटे और दाल से बने लोकप्रिय झारखंडी व्यंजन धुस्का ने सभी का दिल जीत लिया। इसे आलू और चने की सब्जी के साथ परोसा गया, जिसे शिक्षक और छात्रों ने खूब पसंद किया। वहीं नरम और स्वादिष्ट कासी मांस भी कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा। विश्वविद्यालय के शिक्षक और कर्मचारियों ने इसे बड़े आनंद के साथ चखा। इसके अलावा देहाती मुर्गी का स्वाद भी लोगों ने भरपूर सराहा।
साथ ही कछु पत्ता की तरकारी और अन्य पारंपरिक पकवानों ने झारखंड की पाक विविधता को और भी खास बना दिया।
पारंपरिक व्यंजनों की पहचान और संरक्षण जरूरी: कुलपति
कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एस. चटर्जी ने कहा कि इस तरह के आयोजन लोगों को यह समझने का अवसर देते हैं कि झारखंड की पारंपरिक रसोई कितनी पौष्टिक और स्वादिष्ट है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक व्यंजनों को आगे बढ़ाना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है।
गुम होते व्यंजनों को जीवित रखने की पहल: कुलसचिव
विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. अमित कुमार पांडे ने कहा कि कई पारंपरिक व्यंजन अब हमारी दिनचर्या से गायब होते जा रहे हैं। ऐसे फूड फेस्टिवल उन व्यंजनों को फिर से पहचान दिलाने और लोगों में जागरूकता बढ़ाने का काम करते हैं। उन्होंने आयोजन को सफल बनाने के लिए सभी शिक्षकों, छात्रों और कर्मचारियों को धन्यवाद दिया।
