मुख्य बिंदु
झारखंड हाई कोर्ट के निर्देश के बाद रांची नगर निगम ने फरवरी 2025 का क्लोजर आदेश वापस लिया
आदेश वापसी के साथ ही राजधानी रांची में रूफटॉप रेस्टोरेंट खुले रहने का रास्ता साफ
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया—केवल नक्शा न होने के आधार पर कार्रवाई नहीं, स्ट्रक्चरल सेफ्टी ही मानक
अलग-अलग रूफटॉप रेस्टोरेंट की याचिकाओं से नगर निगम पर बढ़ा कानूनी दबाव
रांची नगर निगम अब केवल सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े मामलों में ही जांच करेगा
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2025 में जारी हुआ था 34 रूफटॉप रेस्टोरेंट बंद करने का आदेश
रांची नगर निगम ने फरवरी 2025 में राजधानी रांची के 34 रूफटॉप रेस्टोरेंट को बंद करने का आदेश जारी किया था। नगर निगम का तर्क था कि इन रूफटॉप रेस्टोरेंट के पास आवश्यक स्वीकृत भवन नक्शा नहीं है, जिसके आधार पर तत्काल संचालन बंद करने के निर्देश दिए गए थे। इस आदेश के बाद राजधानी के होटल और रेस्टोरेंट कारोबार में हड़कंप मच गया था।
हाईकोर्ट पहुंचा मामला, नगर निगम के आदेश पर उठे सवाल
नगर निगम के इस आदेश को लेकर कई रूफटॉप रेस्टोरेंट संचालकों ने झारखंड हाईकोर्ट का रुख किया। सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल स्वीकृत नक्शे के अभाव में रूफटॉप रेस्टोरेंट को बंद नहीं किया जा सकता, जब तक कि संरचनात्मक सुरक्षा से जुड़ा कोई गंभीर खतरा सामने न हो। इसके बाद हाईकोर्ट ने नगर निगम की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता शादाब बिन हक ने पक्ष रखा
अलग-अलग याचिकाओं से बढ़ी नगर निगम की मुश्किल
हाईकोर्ट में अलग-अलग रूफटॉप रेस्टोरेंट संचालक व्यक्तिगत याचिकाएं दाखिल कर रहे थे और अपने-अपने मामलों में राहत की मांग कर रहे थे। इस स्थिति पर अदालत ने टिप्पणी करते हुए पूछा कि जब समान परिस्थितियों में बार-बार आदेश निरस्त किए जा रहे हैं, तो रांची नगर निगम अपने मूल आदेश को वापस क्यों नहीं ले लेता।
RMC ने वापस लिया फरवरी 2025 का आदेश
हाईकोर्ट की टिप्पणी और लगातार मिल रही कानूनी फटकार के बाद आखिरकार रांची नगर निगम ने फरवरी 2025 में जारी अपने आदेश को औपचारिक रूप से वापस ले लिया। नगर निगम की ओर से जारी नए आदेश में कहा गया है कि पहले जारी क्लोजर आदेश अब प्रभावी नहीं रहेगा।
रूफटॉप रेस्टोरेंट संचालन का रास्ता हुआ साफ
नगर निगम के आदेश वापस लेने के साथ ही राजधानी रांची में रूफटॉप रेस्टोरेंट के संचालन का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि, नगर निगम ने यह भी स्पष्ट किया है कि भविष्य में केवल उन्हीं मामलों में कार्रवाई की जाएगी, जहां संरचनात्मक सुरक्षा या सार्वजनिक खतरे से जुड़ा कोई ठोस आधार सामने आएगा। इस पूरे घटनाक्रम को झारखंड हाईकोर्ट के दिशा-निर्देशों की बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है।
