🟡 मुख्य बिंदु-
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झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन ने निजी स्कूलों पर मनमानी फीस वसूली का आरोप लगाया
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शिक्षा न्यायाधिकरण अधिनियम 2017 के उल्लंघन की बात कही गई
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अध्यक्ष अजय राय ने राज्य सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की
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प्रत्येक जिले में फीस रेगुलेटरी कमेटी गठित करने का सुझाव
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सरकार की निष्क्रियता पर असंतोष, आंदोलन की चेतावनी
✍️ निजी स्कूलों की फीस वसूली पर उठा विवाद
झारखंड में एक बार फिर से निजी स्कूलों की फीस वसूली को लेकर विवाद गहरा गया है। झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय राय ने आरोप लगाया है कि राज्य के विभिन्न निजी स्कूलों ने चालू शैक्षणिक सत्र में मनमाने ढंग से ट्यूशन फीस के अतिरिक्त एनुअल चार्ज, री-एडमिशन फीस और अन्य शुल्कों में भारी वृद्धि की है, जो पूरी तरह अवैध और गैरकानूनी है।

📚 शिक्षा न्यायाधिकरण अधिनियम 2017 का सीधा उल्लंघन
अजय राय ने साफ तौर पर कहा कि यह पूरा मामला झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण अधिनियम 2017 का उल्लंघन है। इस अधिनियम के तहत बिना सक्षम प्राधिकरण की पूर्व अनुमति के कोई भी स्कूल फीस में वृद्धि नहीं कर सकता। इसके बावजूद निजी स्कूल मनमानी तरीके से फीस वसूल रहे हैं।
📞 अभिभावकों की शिकायतें बनीं आधार
संघ के अनुसार, बीते कुछ महीनों में राज्यभर से अभिभावकों की कई शिकायतें प्राप्त हुई हैं। ये शिकायतें दर्शाती हैं कि स्कूल प्रबंधन ट्यूशन फीस के अलावा विभिन्न नामों से अतिरिक्त राशि वसूलकर अभिभावकों का आर्थिक शोषण कर रहे हैं। कई मामलों में अभिभावकों पर दोबारा एडमिशन फीस देने का दबाव डाला गया है।
🏛️ विधानसभा चर्चा के बाद भी निष्क्रिय प्रशासन
अजय राय ने सरकार की गंभीरता पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि इस गंभीर मुद्दे पर विधानसभा में चर्चा हो चुकी है। इसके बावजूद अब तक किसी भी जिले में उपायुक्तों द्वारा इस विषय को लेकर कोई ठोस बैठक नहीं की गई है, जो दर्शाता है कि राज्य सरकार इस मुद्दे को लेकर गंभीर नहीं है।
📌 क्या है शिक्षा न्यायाधिकरण अधिनियम 2017?
यह अधिनियम राज्य में शिक्षा संस्थानों के कार्यों की निगरानी और शिकायत निवारण के लिए बनाया गया था। इसके तहत स्कूलों की फीस संरचना, प्रवेश प्रक्रिया और अभिभावकों से जुड़ी समस्याओं को नियंत्रित किया जाना चाहिए। अधिनियम का उद्देश्य था पारदर्शिता और जवाबदेही लाना, लेकिन इसे जमीन पर प्रभावी रूप से लागू नहीं किया गया।
🛑 अवैध वसूली पर तत्काल रोक लगाने की मांग
झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन ने राज्य सरकार से अपील की है कि वह शिक्षा न्यायाधिकरण अधिनियम 2017 को तत्काल प्रभाव से लागू करे और चालू सत्र में की गई सभी प्रकार की फीस वृद्धि पर रोक लगाए। संघ ने सरकार से निजी स्कूलों की फीस संरचना की समीक्षा करने की मांग भी की है।
🧾 फीस रेगुलेटरी कमेटी की आवश्यकता
अजय राय ने कहा कि हर जिले में एक फीस रेगुलेटरी कमेटी गठित की जानी चाहिए, जो निजी स्कूलों द्वारा तय की गई फीस की जांच कर सके। इस कमेटी में प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाए ताकि निर्णय निष्पक्ष हो।
📣 संघ का आंदोलन की चेतावनी
संघ ने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी है कि यदि सरकार शीघ्र कोई ठोस कदम नहीं उठाती, तो झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करेगा। इसमें सड़कों पर प्रदर्शन, शिक्षा विभाग के समक्ष धरना और कानूनी कार्रवाई जैसे कदम शामिल होंगे।
“अगर सरकार निजी स्कूलों की लूट पर नियंत्रण नहीं करती है, तो हम मजबूर होकर आंदोलन का रास्ता चुनेंगे।”
— अजय राय, अध्यक्ष, झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन
🔍 निष्कर्ष: अब अभिभावकों की नजर सरकार पर
झारखंड के अभिभावकों की नजर अब राज्य सरकार की कार्रवाई पर टिकी है। यह देखना अहम होगा कि सरकार शिक्षा न्यायाधिकरण अधिनियम को प्रभावी बनाने की दिशा में कितनी तेजी से काम करती है। निजी स्कूलों की मनमानी रोकने के लिए प्रशासन को सख्ती दिखानी होगी, वरना राज्य भर में असंतोष और विरोध की लहर तेज हो सकती है।
