शहीद जवान सुनील धान को राज्यपाल व मुख्यमंत्री ने दी श्रद्धांजलि.
मुख्य बिंदु:
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राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दी श्रद्धांजलि
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झारखंड जगुआर के शहीद जवान सुनील धान को रांची में दी गई अंतिम विदाई
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पश्चिमी सिंहभूम में IED विस्फोट के दौरान शहीद हुए थे जवान
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जराइकेला क्षेत्र में उग्रवादियों से मुठभेड़ में हुई थी घटना
रांची में हुआ अंतिम श्रद्धांजलि समारोह
झारखंड के वीर सपूत और झारखंड जगुआर के जवान सुनील धान को आज रांची स्थित झारखंड जगुआर मुख्यालय में अंतिम विदाई दी गई। इस मौके पर माननीय राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उनके पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि अर्पित की।

मुठभेड़ के दौरान हुए शहीद
बताया गया कि जवान सुनील धान पश्चिमी सिंहभूम जिले के जराइकेला क्षेत्र में उग्रवादियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के दौरान शहीद हुए। मुठभेड़ के दौरान हुए IED विस्फोट में उन्होंने वीरगति प्राप्त की।
राज्य भर में शोक की लहर
शहीद जवान की वीरता को लेकर राज्यभर में शोक की लहर है। सुरक्षा बलों, स्थानीय प्रशासन और आम लोगों ने भी उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके बलिदान को नमन किया।

झारखंड में नक्सलवाद की वापसी?
झारखंड लंबे समय से नक्सलवाद की चुनौती से जूझता आ रहा है। हालांकि बीते कुछ वर्षों में सुरक्षाबलों और सरकार की लगातार कोशिशों के कारण नक्सल गतिविधियों में कमी देखी गई थी, लेकिन वर्ष 2025 की शुरुआत से ही यह समस्या फिर से सिर उठाती नज़र आ रही है। पश्चिमी सिंहभूम, लातेहार, गढ़वा, सरायकेला जैसे जिले एक बार फिर से नक्सली प्रभाव के दायरे में आते दिख रहे हैं।
विशेष रूप से पश्चिमी सिंहभूम जिले के जंगलों में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच हाल के महीनों में कई मुठभेड़ हुई हैं, जिनमें सुरक्षा बलों को भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है।
बढ़ते IED विस्फोट और मुठभेड़
नक्सली अब पारंपरिक हमलों की बजाय आधुनिक तकनीकों का सहारा ले रहे हैं। विशेष रूप से IED विस्फोट एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आए हैं। बीते दो महीनों में करीब आठ से अधिक स्थानों पर आईईडी विस्फोट की घटनाएं सामने आई हैं।
ताज़ा मामला पश्चिमी सिंहभूम के जराइकेला क्षेत्र का है, जहां झारखंड जगुआर के जवान सुनील धान IED विस्फोट में शहीद हो गए। इससे पहले भी लातेहार और गढ़वा जिलों में सुरक्षाबलों को निशाना बनाने के लिए इसी प्रकार के विस्फोट किए गए थे।

‘जन अदालत’ और पोस्टरबाज़ी की वापसी
नक्सलियों द्वारा अपने प्रभाव क्षेत्र में लोगों को डराने और व्यवस्था के खिलाफ उकसाने के लिए ‘जन अदालत’ लगाने की घटनाएं फिर से सामने आ रही हैं। ग्रामीण इलाकों की दीवारों पर लाल रंग से लिखे धमकी भरे संदेश और पोस्टर देखने को मिल रहे हैं, जिनमें पुलिस मुखबिरों को चेतावनी दी जा रही है।
इन घटनाओं से ग्रामीणों में भय का वातावरण बना हुआ है। कई गांवों में लोगों ने रात के समय जंगल या खेत में काम करना बंद कर दिया है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ा है।
सुरक्षा बलों की रणनीति में बदलाव
नक्सली गतिविधियों के बढ़ते खतरे को देखते हुए झारखंड पुलिस, झारखंड जगुआर, CRPF और COBRA बटालियन ने संयुक्त रूप से ऑपरेशन तेज़ किया है। जंगलों में सघन तलाशी अभियान चलाए जा रहे हैं।
इसके लिए अत्याधुनिक उपकरणों का सहारा लिया जा रहा है। ड्रोन कैमरे, ग्राउंड सेंसर और जीपीएस आधारित ट्रैकिंग तकनीक का उपयोग कर नक्सलियों के मूवमेंट पर नजर रखी जा रही है।
हाल ही में एक अभियान के दौरान पश्चिमी सिंहभूम के गुदड़ी थाना क्षेत्र में सुरक्षाबलों ने एक नक्सली कैंप को ध्वस्त किया, जहां से भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री और दस्तावेज बरामद हुए।
दोहरी रणनीति: गोली भी, बोली भी
राज्य सरकार की रणनीति दो हिस्सों में बंटी है—एक तरफ जहां उग्रवादियों पर कड़ी सैन्य कार्रवाई हो रही है, वहीं दूसरी तरफ आत्मसमर्पण की नीति को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
सरकार का मानना है कि नक्सलवाद केवल बंदूक से नहीं, बल्कि विकास और संवाद से भी खत्म किया जा सकता है। इसलिए आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को आर्थिक सहायता, घर, रोजगार और पुनर्वास की सुविधाएं दी जा रही हैं।
वर्ष 2024 में कुल 43 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था, जबकि 2025 की शुरुआत में अब तक 9 उग्रवादियों ने हथियार डाले हैं।
ग्रामीणों की भूमिका अहम
नक्सल प्रभावित इलाकों में ग्रामीणों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। सरकार की कोशिश है कि गांवों में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार की व्यवस्था को बेहतर बनाया जाए ताकि लोग नक्सलवाद की ओर आकर्षित न हों।
इसके लिए विशेष विकास योजनाएं बनाई जा रही हैं। जैसे कि सरायकेला और लातेहार के कुछ गांवों में ‘नवोदय ग्राम योजना’ के तहत सड़क, बिजली, आंगनबाड़ी और स्कूल की सुविधाएं दी जा रही हैं।
निष्कर्ष
झारखंड में नक्सलवाद एक बार फिर से चुनौती बनकर उभर रहा है। बदलती रणनीतियों, बढ़ती घटनाओं और ग्रामीणों में फैलते डर को देखते हुए यह साफ है कि राज्य सरकार और सुरक्षा बलों को अब और सतर्कता के साथ काम करना होगा। साथ ही दीर्घकालिक समाधान के लिए विकास, संवाद और पुनर्वास को प्राथमिकता देनी होगी।
