JPSC exam controversy

“‘नकारा और बेईमान’—JPSC Chairman को हटाने की खुली मांग”

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JPSC Exam Controversy: Paper Missing से लेकर Chairman पर गंभीर आरोप, सिस्टम पर उठे बड़े सवाल

मुख्य बिंदु 

  • बोकारो और रांची के केंद्रों पर प्रश्नपत्र नहीं पहुंचने से परीक्षा रद्द
  • प्रश्नपत्र में एक ही सवाल दो बार, एक प्रश्न में विकल्प गायब
  • नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी का सीधा हमला—JPSC Chairman पर आरोप
  • आयोग को “लूट का अड्डा” बताते हुए सख्त कार्रवाई की मांग
  • अभ्यर्थियों में नाराजगी, परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल

परीक्षा में गड़बड़ियों ने बढ़ाई चिंता

झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की स्थिति लगातार सवालों के घेरे में है। हाल ही में आयोजित JPSC पात्रता परीक्षा में कई गंभीर खामियां सामने आईं, जिसने पूरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता को झटका दिया है।

सबसे बड़ी गड़बड़ी तब सामने आई जब बोकारो और रांची के एक-एक परीक्षा केंद्र पर प्रश्नपत्र समय पर पहुंच ही नहीं पाया, जिसके चलते परीक्षा को रद्द करना पड़ा। इसके अलावा, अंग्रेज़ी विषय के प्रश्नपत्र में एक ही पैसेज से एक ही प्रश्न को दो बार पूछे जाने और एक प्रश्न में विकल्प गायब होने की बात भी सामने आई है।

ये घटनाएं इस ओर इशारा करती हैं कि परीक्षा आयोजन में लापरवाही और प्रबंधन की गंभीर कमी है।

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बाबूलाल मरांडी का हमला—Chairman को हटाने की मांग

इन गड़बड़ियों को लेकर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से इस मामले में सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।

मरांडी ने सीधे JPSC Chairman को निशाने पर लेते हुए उन्हें “अयोग्य और नकारा” बताया और आरोप लगाया कि आयोग अब पारदर्शी संस्था नहीं रह गया है। उनके मुताबिक, JPSC में परीक्षा संचालन से लेकर आउटसोर्सिंग, ठेके और नियुक्तियों तक में गंभीर अनियमितताएं हो रही हैं।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नौकरियों तक की “बोली लगाकर पहले से बेच देने” जैसी स्थिति बन चुकी है, जो बेहद चिंताजनक है।

‘लूट का अड्डा’ बना आयोग?

मरांडी ने अपने बयान में कहा कि कुछ लोगों ने JPSC को “लूट का अड्डा” बना दिया है, जहां मुख्य ध्यान पारदर्शी परीक्षा कराने के बजाय कमीशनखोरी और ठेकेदारी पर है।

उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि जो अधिकारी अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल हो रहे हैं, उन्हें तत्काल हटाया जाए और उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

छात्रों के भविष्य पर संकट

बार-बार सामने आ रही ऐसी गड़बड़ियों ने अभ्यर्थियों के बीच गहरी नाराजगी पैदा कर दी है। कई छात्रों का कहना है कि वे सालों की मेहनत और तैयारी के बाद परीक्षा देते हैं, लेकिन इस तरह की लापरवाही उनके सपनों को तोड़ रही है।

यदि समय रहते व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो युवाओं का भरोसा पूरी परीक्षा प्रणाली से उठ सकता है।

क्या होगी कार्रवाई?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार इस मामले में ठोस कदम उठाएगी? क्या JPSC में जवाबदेही तय होगी और दोषियों पर कार्रवाई होगी, या फिर यह मामला भी अन्य विवादों की तरह समय के साथ ठंडा पड़ जाएगा?

झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए इस मुद्दे पर त्वरित और कड़े निर्णय की जरूरत महसूस की जा रही है।

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