रांची। आईसीएआर-अटारी, पटना द्वारा नामकुम स्थित राष्ट्रीय कृषि उच्चतर प्रसंस्करण संस्थान में आयोजित बिहार एवं झारखंड के 68 कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) की तीन दिवसीय वार्षिक क्षेत्रीय समीक्षात्मक कार्यशाला का समापन सोमवार को हुआ। समापन सत्र के मुख्य अतिथि डॉ. एस.सी. दुबे (बीएयू कुलपति) ने कहा कि केवीके जिला स्तर पर किसानों के लिए कृषि से जुड़ा प्रमुख शैक्षणिक केंद्र हैं, जहां लाभकारी व वैज्ञानिक कृषि ज्ञान उपलब्ध कराया जाता है। उन्होंने दोनों राज्यों में कृषि विस्तार कार्यों को सराहनीय बताते हुए बदलते कृषि परिवेश और डिजिटल युग में किसानोपयोगी गतिविधियों को वैज्ञानिक ढंग से प्रस्तुत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
सफलता की कहानियों के सामाजिक प्रभाव के अध्ययन पर बल
कुलपति ने कहा कि केवीके ने अनेक सफलता की कहानियां रची हैं, लेकिन इनका लाभ सीमित किसानों तक न रहे, इसके लिए जिले के अन्य किसानों पर पड़ने वाले सामाजिक प्रभाव (सोशल इम्पैक्ट) का अध्ययन, विश्लेषण और उससे सीख लेना जरूरी है। उन्होंने केवीके से अपेक्षा जताई कि वे अपनी उपलब्धियों का व्यापक प्रभाव सुनिश्चित करें।
अटारी निदेशक का सम्मान
इस अवसर पर डॉ. अंजनी कुमार को अटारी निदेशक के रूप में अंतिम क्षेत्रीय कार्यशाला के सफल आयोजन के लिए शॉल एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
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उत्कृष्ट कार्यों के लिए केवीके और वैज्ञानिक सम्मानित
कार्यशाला में आय सृजन, आईसीएआर निधि से कृषि विकास, सीड हब, गुणवत्तायुक्त बीज उत्पादन, उन्नत प्रत्यक्षण, आधुनिक कृषि यंत्र, निकरा, आर्या, जलवायु अनुकूल कृषि, फार्म इनोवेशन, टीएसपी प्रत्यक्षण, प्रसंस्करण इकाई संचालन और देशज तकनीक उन्नयन जैसे कार्यक्रमों में उत्कृष्ट योगदान के लिए केवीके और उनके वरिष्ठ वैज्ञानिकों को सम्मानित किया गया। उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सर्वाधिक चार पुरस्कार KVK Divyayan Ranchi को मिले, जिन्हें वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. अजीत कुमार सिंह ने ग्रहण किया। इस केंद्र के मिलेट उत्पाद और धान की देशज तकनीक उन्नयन कार्यक्रम को विशेष सराहना मिली।
बेस्ट सक्सेस स्टोरी पुरस्कार
कार्यशाला में बिहार एवं झारखंड के केवीके द्वारा कुल 132 सफलता की कहानियां प्रस्तुत की गईं। बेस्ट सक्सेस स्टोरी के लिए केवीके भागलपुर को प्रथम, केवीके लातेहार व पटना को द्वितीय तथा केवीके गढ़वा व देवघर को तृतीय पुरस्कार प्रदान किया गया, जिन्हें कुलपति ने संबंधित केवीके प्रभारियों को सौंपा।
ज्ञान-साझेदारी और मूल्यवर्धन पर फोकस
विशिष्ट अतिथि डॉ. ए. कार (निसा निदेशक) ने कार्यशाला को केवीके वैज्ञानिकों के लिए ज्ञान-अध्ययन, अनुभव-साझेदारी और तकनीकी सहयोग का प्रभावी मंच बताया तथा फसल कटाई उपरांत उत्पादों के मूल्यवर्धन पर बल दिया। स्वागत भाषण में अटारी निदेशक डॉ. अंजनी कुमार ने राष्ट्रीय व क्षेत्रीय संस्थानों से प्राप्त नवीन कृषि तकनीकों को जिला स्तर पर सभी हितधारकों और अधिकाधिक किसानों तक पहुंचाने की सलाह दी।
समापन और सहभागिता
कार्यशाला में डॉ. विशाल नाथ, डॉ. रेखा सिन्हा, डॉ. रतनेश झा, डॉ. निर्मल सिंह, डॉ. धर्मवीर सिंह एवं डॉ. प्रज्ञा भदुडिया सहित दोनों राज्यों के 68 केवीके के वरिष्ठ वैज्ञानिक-सह-प्रधान उपस्थित रहे। धन्यवाद ज्ञापन अटारी के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. मोनोबुल्लाह ने किया, जबकि मंच संचालन डॉ. अंजेश कुमार ने किया।
