मुख्य बिंदु-
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श्रद्धांजलि सभा का आयोजन: डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, रांची के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग में तीन प्रमुख झारखंडी साहित्यकारों की आत्मा की शांति के लिए शोक सभा का आयोजन किया गया।
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साहित्यकारों की पहचान: श्रद्धांजलि देने वाले साहित्यकारों में डॉ. रोज केरकेट्टा, डॉ. राम प्रसाद और डॉ. बी. पी. पिंगुआ शामिल थे।
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डॉ. रोज केरकेट्टा का योगदान: वे हिंदी और खड़िया भाषा की प्रसिद्ध प्राध्यापिका और साहित्यकार थीं। उनका 17 अप्रैल 2025 को निधन हुआ।
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डॉ. राम प्रसाद का योगदान: डॉ. राम प्रसाद, हिंदी और नागपुरी भाषा के प्राध्यापक, 12 अप्रैल 2025 को निधन हुए।
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डॉ. बी. पी. पिंगुआ का योगदान: वे हो भाषा के प्राध्यापक और साहित्यकार थे, जिनका 31 मार्च 2025 को निधन हुआ।
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साहित्यिक योगदान: इन साहित्यकारों ने खड़िया, नागपुरी और हो भाषा में साहित्य रचनाएं कीं और मातृभाषाओं के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
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टीआरएल विभाग की भूमिका: 1980 में टीआरएल विभाग की स्थापना के समय इन साहित्यकारों को मातृभाषा के क्लास लेने के लिए बुलाया गया था।
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साहित्यकारों के सम्मान में उपस्थिति: इस श्रद्धांजलि सभा में विभिन्न भाषाओं के प्राध्यापक और शोधार्थी शामिल हुए।
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साहित्यकारों के प्रमुख कार्य: डॉ. बी. पी. पिंगुआ की कृतियों में “नुङ हम लुकु सारजोम”, “जुलोः चा”, “छोटनागपुर योजना रेयः मरसल” आदि प्रमुख रचनाएँ शामिल हैं।
रांची विश्वविद्यालय में आदिवासी भाषाओं के तीन महान साहित्यकारों को श्रद्धांजलि
रांची, 29 अप्रैल 2025: डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, रांची के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग ने तीन प्रतिष्ठित साहित्यकारों—डॉ. रोज केरकेट्टा, डॉ. राम प्रसाद और डॉ. बी. पी. पिंगुआ—की आत्मा की शांति के लिए एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया।

🌿 डॉ. रोज केरकेट्टा: खड़िया भाषा की संरक्षक
डॉ. रोज केरकेट्टा का 17 अप्रैल 2025 को 85 वर्ष की आयु में निधन हुआ। वे हिंदी और खड़िया भाषाओं की प्राध्यापिका, साहित्यकार और समाजसेवी थीं। उन्होंने खड़िया लोककथाओं का संग्रहण और अनुवाद किया, जिनमें “प्रेमचंदो लुडको” (प्रेमचंद की कहानी का खड़िया में अनुवाद) और “सिंको सुलो” (खड़िया कहानी संग्रह) प्रमुख हैं। उन्हें रानी दुर्गावती सम्मान, अयोध्या प्रसाद खत्री सम्मान और प्रभावती सम्मान जैसे पुरस्कार प्राप्त हुए थे।
📚 डॉ. राम प्रसाद: नागपुरी साहित्य के स्तंभ
डॉ. राम प्रसाद का 12 अप्रैल 2025 को निधन हुआ। वे हिंदी और नागपुरी भाषा के प्राध्यापक, साहित्यकार और नागपुरी भाषा परिषद तथा छोटानागपुर सांस्कृतिक संघ के अध्यक्ष थे। उनकी प्रमुख कृतियों में “स्वातंत्र्योत्तर नागपुरी साहित्य: एक शास्त्रीय अध्ययन”, “कोरी व्हिर पझरा” और “नागपुरी बाल लोककथा” शामिल हैं। उन्हें साहित्यिक सांस्कृतिक कला संगम से विद्यावाचस्पति की मानद उपाधि प्राप्त थी।

डॉ. बी. पी. पिंगुआ: हो भाषा के पहले प्राध्यापक
डॉ. बी. पी. पिंगुआ का 31 मार्च 2025 को निधन हुआ। वे भूगोल के प्राध्यापक थे, लेकिन हो भाषा से गहरा लगाव रखते हुए उन्होंने हो भाषा में कई रचनाएँ कीं। वे जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग में हो भाषा के पहले प्राध्यापक थे और 1980 से 2001 तक कार्यरत रहे। उनकी प्रमुख कृतियों में “नुंग हम लुकु सारजोम”, “अबुअः दुरं” और “नाअ नेना बानो” शामिल हैं।
🕊️ शोक सभा में उपस्थित गणमान्य व्यक्ति
श्रद्धांजलि सभा में नागपुरी के प्राध्यापक डॉ. मालती बागिशा लकड़ा, डॉ. मनोज कच्छप, हो के डॉ. जय किशोर मंगल, कुड़माली के डॉ. निताई चंद्र महतो, खड़िया के शांति केरकेट्टा, संतालि के डॉ. डुमनी माई मुर्मू, संतोष मुर्मू, खोरठा की सुशिला कुमारी, कुड़ुख की सुनिता कुमारी, विभाग के सभी शोधार्थी और सैंकड़ों छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।
इस श्रद्धांजलि सभा ने इन महान साहित्यकारों के योगदान को याद करते हुए उनके कार्यों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने का संकल्प लिया।
