संत पेत्रुस कॉलेज में गूंजे ढोल-नगाड़े, ‘आभास’ समारोह में दिखी झारखंड की झलक

झारखंड/बिहार ताज़ा ख़बर राष्ट्रीय ख़बर

रोम में ‘आभास’ द्वारा पारंपरिक आदिवासी स्वागत समारोह का भव्य आयोजन

नए साथियों का कांसे के लोटे और ढोल-नगाड़ों के बीच परंपरागत स्वागत, बिशप आनंद जोजो ने दिया प्रेरणादायी संदेश

रोम, संत पेत्रुस कॉलेज, रोम में ‘आभास’ (अखिल भारतीय आदिवासी समुदाय) द्वारा इस वर्ष रोम पहुँचे नए आदिवासी भाई-बहनों के स्वागत में एक भव्य पारंपरिक समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का माहौल उल्लास और भावनाओं से भरा रहा, जिसमें 100 से अधिक लोग शामिल हुए।

आभास अध्यक्ष ने किया स्वागत
समारोह की शुरुआत ‘आभास’ के अध्यक्ष फादर विजय टोप्पो के स्वागत संबोधन से हुई। उन्होंने उपस्थित सभी अतिथियों का गर्मजोशी से अभिनंदन करते हुए बताया कि यह आयोजन सिर्फ परिचय का नहीं, बल्कि अपनी जड़ों और परंपराओं से जुड़ाव का प्रतीक है। उन्होंने कहा, “यह मंच हमारे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक एकता का परिचायक है।”

बिशप आनंद जोजो ने संपन्न कराया पवित्र मिस्सा बलिदान
इसके पश्चात हजारीबाग के बिशप, अति माननीय धर्माध्यक्ष आनंद जोजो द्वारा पवित्र मिस्सा बलिदान का अनुष्ठान संपन्न हुआ। अपने प्रेरणादायी प्रवचन में उन्होंने कहा, “हम सभी येसु मसीह की शिक्षा के प्रचारक बनने के लिए बुलाए गए हैं। इस जुबली वर्ष में हमें आशा के दीप बनकर हर निराश व्यक्ति तक संदेश पहुंचाना है।” उन्होंने रोम में अध्ययनरत भारतीय छात्रों को भी शुभकामनाएँ दीं।

पारंपरिक नृत्य बना आकर्षण का केंद्र
कार्यक्रम का सबसे आकर्षक क्षण तब आया जब पारंपरिक कांसे के लोटे, थरिया और ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच पारंपरिक आदिवासी नृत्य प्रस्तुत किया गया। इस नृत्य के माध्यम से नए साथियों का स्वागत किया गया, जिससे पूरा वातावरण उल्लास और सांस्कृतिक गर्व से भर उठा।

परिचय सत्र और प्रीति भोज के साथ हुआ समापन
सिस्टर ऐलिस और फादर आलोक के नेतृत्व में आयोजित परिचय सत्र में सभी प्रतिभागियों ने एक-दूसरे से परिचय प्राप्त किया और अपनी कहानियाँ साझा कीं। इसके बाद प्रीति भोज और पारंपरिक नृत्य के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। अंत में फादर विजय टोप्पो ने सभी आगंतुकों, आयोजकों और सहभागियों का आभार प्रकट किया।

‘आभास’ — प्रवास में संस्कृति से जुड़ाव का सेतु
‘आभास’ यानी अखिल भारतीय आदिवासी समुदाय, रोम स्थित एक ऐसा आध्यात्मिक और सांस्कृतिक मंच है जो भारत के विभिन्न हिस्सों से उच्च शिक्षा या धर्म-सेवा हेतु आए हुए आदिवासी विद्यार्थियों और धर्माचार्यों को एकजुट करता है। यह संस्था प्रवास में भी अपनी सांस्कृतिक पहचान को जीवित रखने और सामुदायिक बंधन को मजबूत करने का कार्य करती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *