“जश्न नहीं, जवाब दो”—हेमंत सरकार के एक साल पर बीजेपी का तीखा वार
हेमंत सरकार पार्ट–2 के एक वर्ष पूरे होने पर भारतीय जनता पार्टी ने राज्य सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा है कि जश्न मनाने से पहले जनता के मूल प्रश्नों का उत्तर देना जरूरी है। प्रदेश प्रवक्ता अजय साह ने आरोप लगाया कि सरकार उत्सव के माहौल में खोई हुई है, जबकि राज्य के युवा, बेरोजगार और आम लोग अपने मुद्दों पर समाधान की इंतजार में बैठे हैं।
अजय साह ने कहा कि सरकार ने रोजगार सृजन को लेकर बड़े-बड़े दावे किए, लेकिन जमीनी स्तर पर उपलब्धियाँ दिखाई नहीं देतीं। उन्होंने तंज कसा कि रोजगार देने के बजाय सरकार शिल्पा राव जैसे कार्यक्रमों में व्यस्त रही और बेरोजगार युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ किया गया। उन्होंने पूछा कि पूरे एक साल में कितने युवाओं को नौकरी मिली और कौन-से सेक्टर में नई नौकरियाँ सृजित हुईं।
बीजेपी प्रवक्ता ने बढ़ते अपराधों पर भी सरकार को घेरा और कहा कि पिछले एक वर्ष में अपराध का ग्राफ लगातार ऊपर गया है, लेकिन सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। उन्होंने सवाल उठाया कि भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों से घिरे अफ़सर छवि रंजन और वीरेंद्र राम को दंडित करने के बजाय फिर से सिस्टम में क्यों जगह दी गई। उन्होंने यह भी पूछा कि ईडी द्वारा भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ भेजे गए पत्र पर अब तक क्या कार्रवाई हुई।
इसी क्रम में उन्होंने डीजीपी नियुक्ति पर निशाना साधते हुए कहा कि संवैधानिक प्रक्रिया से हटकर एक विवादित व्यक्ति को डीजीपी बनाया गया, जिसका जवाब सरकार को देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी ठेकों में एक विशेष समुदाय को लाभ पहुँचाने की प्रवृत्ति बढ़ी है, जबकि भाजपा द्वारा भेजे गए अनियमितताओं के पत्रों पर सरकार ने कोई कार्यवाही नहीं की।
अजय साह ने मुख्यमंत्री के विदेश दौरे पर भी सवाल उठाए और कहा कि सरकार यह बताए कि इन यात्राओं से राज्य को क्या व्यावहारिक लाभ मिला। उन्होंने कहा कि सरकार आदिवासियों पर बढ़ते अत्याचारों पर मौन है, जबकि राज्य में लगातार चिंताजनक घटनाएँ सामने आ रही हैं।
बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि मंत्री और नौकरशाहों की जवाबदेही तय करने में सरकार विफल रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बांग्लादेशी घुसपैठियों के लिए फर्जी आधार कार्ड बनवाए जाने के मामलों पर भी सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
अंत में अजय साह ने कहा कि हेमंत सरकार के लिए उत्सव मनाने का यह समय नहीं है; जनता यह जानना चाहती है कि एक साल में सरकार ने क्या किया। सरकार को जश्न छोड़कर अपने कामकाज का पारदर्शी और ईमानदार हिसाब देना चाहिए।
