डीएमएफटी घोटाला झारखंड में फैला नेटवर्क: बाबूलाल मरांडी ने उठाई उच्च स्तरीय जांच की मांग
मुख्य बिंदु:
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बाबूलाल मरांडी ने डीएमएफटी घोटाले को झारखंडव्यापी बताया
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कोडरमा और धनबाद में नए तथ्य आने का दावा
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आईएएस अधिकारी आदित्य रंजन पर गंभीर आरोप
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MEPSC और तितली फाउंडेशन से मिलीभगत के आरोप
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सीएम हेमंत सोरेन से उच्च स्तरीय जांच की मांग
झारखंड में डीएमएफटी फंड को लेकर लगातार नए खुलासे सामने आ रहे हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने एक बार फिर इस मुद्दे को सोशल मीडिया पर उठाते हुए झारखंड सरकार पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जैसा कि उन्होंने पहले भी कहा था, बोकारो का मामला सिर्फ एक झलक है, जबकि असली भ्रष्टाचार पूरे राज्य में फैला हुआ है।
मरांडी ने अपने पोस्ट में लिखा, “अब कोडरमा और धनबाद से भी नए तथ्य सामने आ रहे हैं। आम तौर पर आईएएस अधिकारी एक जिले से दूसरे जिले में अनुभव लेकर जाते हैं, लेकिन हेमंत सरकार में अधिकारी अपने साथ अपने पुराने दलालों और ठेकेदार साझेदारों को भी ले जाते हैं।”
कोडरमा और धनबाद में ‘स्किल डेवलपमेंट’ के नाम पर फंड की लूट
मरांडी के अनुसार, कोडरमा में डीसी रहते हुए आईएएस आदित्य रंजन ने डीएमएफटी फंड से “स्किल डेवलपमेंट” के नाम पर MEPSC और तितली फाउंडेशन के साथ मिलकर जमकर घोटाला किया। अब जब वे धनबाद के डीसी बने हैं, तो वही खेल फिर से दोहराया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इन कंपनियों के साथ सांठगांठ कर डीएमएफटी फंड को फिर से लूटा जा रहा है और टेंडर की शर्तों में इस तरह बदलाव किया गया है कि मनचाही कंपनियों को फायदा पहुँचाया जा सके।
मुख्यमंत्री से जांच की मांग
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से आग्रह किया है कि कोडरमा में वर्ष 2022–24 के दौरान डीएमएफटी फंड के उपयोग की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही, आदित्य रंजन और प्रांजल मोदी के बीच के संबंधों की भी जांच होनी चाहिए।
मरांडी ने यह भी कहा कि धनबाद में डीएमएफटी फंड से जुड़े सभी चल रहे टेंडर प्रक्रियाओं को तत्काल रोक दिया जाए ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जा सके।
भ्रष्टाचार पर भाजपा का लगातार हमला
यह पहला मौका नहीं है जब बाबूलाल मरांडी ने डीएमएफटी फंड को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। इससे पहले भी उन्होंने बोकारो में हुई अनियमितताओं का मुद्दा उठाते हुए कहा था कि “डीएमएफटी घोटाला झारखंड के हर जिले में फैला हुआ है और सरकार इसे नजरअंदाज नहीं कर सकती।”
मरांडी के इस बयान से झारखंड की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है। विपक्ष इसे “भ्रष्टाचार का संगठित नेटवर्क” बता रहा है जबकि सत्तापक्ष की ओर से अब तक इस पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
