अंगीभूत कॉलेजों में इंटर नामांकन को लेकर वित रहित मोर्चा सख्त, कोर्ट में अवमानना याचिका की चेतावनी
मुख्य बिंदु:
अगर सत्र 2025–27 में इंटरमीडिएट में नामांकन की अनुमति दी गई तो कोर्ट में जाएगी वित रहित मोर्चा
सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट दोनों ने पहले ही नामांकन पर रोक लगाई है
नई शिक्षा नीति के तहत 9वीं से 12वीं तक की पढ़ाई एक ही संस्था में होनी चाहिए
राज्य में पर्याप्त इंटर सीटें मौजूद, फिर भी नई कमेटी बना रही सरकार
मोर्चा की मांग – इंटर पढ़ाई को प्लस टू स्कूलों तक सीमित रखा जाए
नामांकन पर चेतावनी, कोर्ट की अवमानना याचिका दाखिल करने की तैयारी
वित्त रहित मोर्चा ने चेतावनी दी है कि यदि राज्य सरकार या विश्वविद्यालयों के कुलपति सत्र 2025–27 में अंगीभूत कॉलेजों को इंटरमीडिएट में नामांकन की अनुमति देते हैं, तो वह इसे नई शिक्षा नीति के खिलाफ मानते हुए माननीय उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय में अवमानना याचिका दायर करेंगे।
इस चेतावनी के पीछे मोर्चा की दलील है कि देश में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP) लागू हो चुकी है, और इसके तहत इंटरमीडिएट की पढ़ाई अब केवल प्लस टू स्कूलों में ही होनी चाहिए।
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नामांकन से जुड़ा विवाद: न्यायिक प्रक्रिया से लेकर जैक के आदेश तक
बता दें कि रांची विश्वविद्यालय ने सत्र 2024–26 में कुछ अंगीभूत कॉलेजों में इंटर नामांकन की अनुमति दी थी। लेकिन झारखंड अधिविध परिषद (जैक) ने पंजीयन से इनकार कर दिया। इसके खिलाफ कुछ छात्र और विश्वविद्यालय प्रशासन झारखंड हाई कोर्ट गए, लेकिन राहत नहीं मिली।
बाद में मामला सुप्रीम कोर्ट तक गया, पर वहां भी कोई राहत नहीं दी गई और केस दोबारा हाई कोर्ट को रेफर किया गया। अंततः झारखंड हाई कोर्ट ने पुनः राहत न देते हुए याचिका खारिज कर दी।
बाद में विश्वविद्यालय ने छात्रों के पंजीयन व फॉर्म भरने के लिए फिर हाई कोर्ट का रुख किया। अदालत ने छात्रों के हित में कदम उठाते हुए उन्हें प्लस टू स्कूलों के माध्यम से फॉर्म भरने की अनुमति दी और स्पष्ट किया कि यह सुविधा भविष्य में नहीं मिलेगी।
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नई शिक्षा नीति लागू, सीटों की कोई कमी नहीं
नई शिक्षा नीति 2020 संसद द्वारा पारित और राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद देशभर में लागू हो चुकी है। नीति के अनुसार पढ़ाई के 5+3+3+4 फॉर्मेट को लागू करना अनिवार्य है।
झारखंड के विश्वविद्यालयों में NEP के तहत पाठ्यक्रम निर्धारित किए जा चुके हैं और पढ़ाई इसी ढांचे में हो रही है। वर्ष 2021–22 में राज्यपाल की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में निर्णय लिया गया था कि अब अंगीभूत और संबद्ध कॉलेजों में इंटरमीडिएट नामांकन नहीं होंगे।
झारखंड अधिविध परिषद के मुताबिक, राज्य में इंटरमीडिएट की पढ़ाई के लिए पर्याप्त सीटें उपलब्ध हैं:
187 स्थाई मान्यता प्राप्त इंटर कॉलेज (प्रत्येक संकाय में 512 सीटें)
86 स्थापना अनुमति प्राप्त कॉलेज (प्रत्येक संकाय में 128 सीटें)
950 सरकारी प्लस टू स्कूल (राजकीयकृत, मॉडल, कस्तूरबा आदि)
कुल उपलब्ध सीटें: लगभग 12 लाख
जबकि हर वर्ष मैट्रिक उत्तीर्ण छात्र: लगभग 4 लाख
इस लिहाज से इंटर शिक्षा के लिए कोई सीट संकट नहीं है, और नई शिक्षा नीति को लागू करने के लिए कोई बाधा नहीं होनी चाहिए।
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फिर भी मंत्रिमंडलीय समिति गठन पर उठे सवाल
इस बीच सरकार ने तीन सदस्यीय मंत्रिमंडलीय कमेटी गठित की है, जो नामांकन के मुद्दे पर समीक्षा कर रही है और एक साल की राहत देने पर विचार कर रही है।
वित्त रहित मोर्चा ने इस कदम को सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के आदेशों की अवहेलना बताया है, क्योंकि पहले ही अदालतें स्पष्ट कर चुकी हैं कि अंगीभूत कॉलेजों में इंटरमीडिएट की पढ़ाई को मंजूरी नहीं दी जा सकती।
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रांची विश्वविद्यालय के कॉलेजों में नामांकन की संख्या बेहद कम
मोर्चा द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, रांची विश्वविद्यालय से संबद्ध जिन कॉलेजों में इंटरमीडिएट नामांकन हुआ है, वहां छात्रों की संख्या बेहद कम है। जैसे:
डोरंडा कॉलेज: 21 छात्र
जेएम कॉलेज, धुर्वा: 20 छात्र
करमचंद कॉलेज, बेड़ो: 25 छात्र
मारवाड़ी कॉलेज: 30 छात्र
मारवाड़ी विमेंस कॉलेज: 15 छात्र
बिरसा कॉलेज, खूंटी: 2 छात्र
चास कॉलेज, बोकारो: 44 छात्र
(कुल नामांकन – लगभग 27,500 छात्र)
मोर्चा का तर्क है कि इतने कम नामांकन के लिए कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन उचित नहीं है।
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मोर्चा की मांग: एकीकृत पढ़ाई और नीति की स्पष्टता
मोर्चा ने राज्य सरकार से मांग की है कि:
9वीं से 12वीं तक की पढ़ाई एक ही परिसर में सुनिश्चित की जाए
प्लस टू स्कूलों और इंटर कॉलेजों को इस दिशा में सक्रिय किया जाए
मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में इस मुद्दे को प्राथमिक एजेंडा में रखा जाए
राज्य में नई शिक्षा नीति को पूर्ण रूप से लागू किया जाए
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अध्यक्ष मंडल की बैठक 12 जून को, होंगे अहम निर्णय
मोर्चा ने इस मुद्दे पर आगे की रणनीति तय करने के लिए 12 जून को अध्यक्ष मंडल की बैठक बुलाई है। इसमें उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल करने, राज्य सरकार से संवाद और आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी।
इस संबंध में प्रेस को जानकारी मोर्चा के प्रतिनिधियों – मनीष कुमार, अरविंद सिंह और मुरारी प्रसाद सिंह ने दी।
