Jharkhand Liquor Scam

शराब घोटाले में CM पर सीधा आरोप, बाबूलाल ने ACB जांच को बताया दिखावा

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मुख्य बिंदु-

• शराब घोटाले में सीएम की भूमिका का आरोप
• एसीबी जांच को बड़े लोगों को बचाने की साजिश बताया
• आईएएस अधिकारियों के “एक जैसे बयान” पर सवाल
• 2022 में ही सीएम को पत्र लिखकर चेताने का दावा
• मामले की सीबीआई जांच की मांग

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रांची।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य में सामने आए शराब घोटाले को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि एसीबी की जांच के बीच जो तथ्य सामने आ रहे हैं, वे सामान्य नहीं बल्कि बड़े और गंभीर भ्रष्टाचार की ओर इशारा करते हैं।

एक प्रेस वार्ता में मरांडी ने सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि शराब घोटाले में तत्कालीन उत्पाद सचिव आईएएस विनय चौबे के साथ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में एसीबी जांच चल रही है और विनय चौबे फिलहाल जेल में हैं, लेकिन जांच की दिशा संदेह के घेरे में है।

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आईएएस अधिकारियों के बयान पर सवाल

मरांडी ने कहा कि एसीबी द्वारा जिन पूर्व उत्पाद आयुक्तों—अमित कुमार, कर्ण सत्यार्थी और फैज अहमद—से पूछताछ की जा रही है, उनके बयान मीडिया में लगभग एक जैसे छप रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अमित कुमार का बयान है कि “जो विनय चौबे ने चाहा, वही हुआ”, जबकि कर्ण सत्यार्थी ने कहा कि “विनय चौबे ने केस दर्ज करने से मना किया था”। मरांडी के मुताबिक, ऐसे बयान सामान्य नहीं हैं, बल्कि यह बड़े स्तर के भ्रष्टाचार की ओर इशारा करते हैं।

“बड़े लोगों को बचाने की साजिश”

नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि एसीबी द्वारा की जा रही पूछताछ बड़े लोगों को बचाने की सुनियोजित साजिश का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि जिन अधिकारियों के बयान सामने आए हैं, वे सभी आईएएस अधिकारी हैं। यदि उन पर नियमविरुद्ध काम करने का दबाव था, तो उन्हें फाइल पर नोटिंग करनी चाहिए थी, मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री से मिलकर शिकायत करनी चाहिए थी।

उन्होंने सवाल उठाया कि इन अधिकारियों ने फाइल में दबाव का उल्लेख क्यों नहीं किया, सीएस या सीएम से शिकायत क्यों नहीं की और अगर की थी तो उन्हें क्या जवाब मिला। मरांडी ने कहा कि इससे संदेह और गहराता है और यह जांच का नया विषय बनता है।

“रटे-रटाए बयान” का आरोप

श्री मरांडी ने कहा कि इन अधिकारियों के बयान सुनकर ऐसा लगता है कि वे “रटे-रटाए तोते” की तरह बोल रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन्हें अदालत में भी इसी तरह बयान देने का निर्देश है, ताकि बड़े लोगों को बचाया जा सके।

2022 में किया था आगाह

मरांडी ने दावा किया कि उन्होंने वर्ष 2022 में ही मुख्यमंत्री को संभावित शराब घोटाले को लेकर पत्र लिखकर आगाह किया था, लेकिन मुख्यमंत्री ने कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने कहा कि इससे स्पष्ट होता है कि विनय चौबे के साथ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी इस घोटाले में शामिल हैं और सरकारी अधिकारी सीएम को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।

एसीबी और डीजीपी पर भी सवाल

उन्होंने एसीबी की जांच को “नौटंकी” करार देते हुए कहा कि एसीबी के डीजीपी पर खुद भ्रष्टाचार के आरोप हैं। ऐसे में उनसे निष्पक्ष और ईमानदार जांच की उम्मीद कैसे की जा सकती है।

सीबीआई जांच की मांग

मरांडी ने कहा कि यदि मुख्यमंत्री खुद पाक-साफ हैं, तो उन्हें पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंप देनी चाहिए।

डीसी पदस्थापना पर आपत्ति

उन्होंने यह भी कहा कि जिन पूर्व आयुक्तों से पूछताछ हुई है, वे सभी आज जिलों में उपायुक्त जैसे महत्वपूर्ण पदों पर पदस्थापित हैं। सवाल यह है कि जो अधिकारी दबाव में काम करते हैं और नियमों का पालन नहीं करते, वे उपायुक्त के रूप में कितनी ईमानदारी से काम करेंगे। मरांडी ने ऐसे अधिकारियों को हटाने की मांग की।

प्रेस वार्ता में भाजपा के मीडिया प्रभारी शिवपूजन पाठक और सह मीडिया प्रभारी योगेंद्र प्रताप सिंह भी उपस्थित थे।

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