मारंग गोमके जयपाल सिंह मुंडा की जयंती और ऑक्सफोर्ड ब्लू खिताब का शताब्दी समारोह
झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा के तत्वावधान में मारंग गोमके जयपाल सिंह मुंडा की जयंती और ऑक्सफोर्ड ब्लू खिताब (1925-2025) के शताब्दी समारोह का आयोजन कचहरी रोड स्थित जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में किया गया।
जुलूस और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन
कार्यक्रम की शुरुआत अल्बर्ट एक्का चौक से झारखंड आंदोलनकारियों के जुलूस के साथ हुई। पारंपरिक वाद्ययंत्रों और लाल-हरे झंडों के साथ नारे लगाते हुए लोग जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम पहुंचे। स्टेडियम में जयपाल सिंह मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
झारखंड आंदोलनकारी वार्षिक कैलेंडर का लोकार्पण
इस अवसर पर झारखंड आंदोलनकारी वार्षिक कैलेंडर का लोकार्पण किया गया। इसके साथ ही मुख्यमंत्री को पत्र प्रेषित कर दिशुम गुरु शिबू सोरेन और अन्य आंदोलनकारियों को गजट अधिसूचित कर सम्मानित करने की मांग की गई।
सरकार से प्रमुख मांगें
आंदोलनकारियों ने सरकार से निम्नलिखित मांगें की:
- सभी झारखंड आंदोलनकारियों को गजट में अधिसूचित किया जाए।
- जेल जाने की बाध्यता समाप्त की जाए।
- आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों को ₹50,000 मासिक पेंशन दी जाए।
- झारखंड आंदोलनकारियों को राजकीय मान-सम्मान और रोज़गार की गारंटी दी जाए।
जयपाल सिंह मुंडा के योगदान पर प्रकाश
झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा के संस्थापक और प्रधान सचिव पुष्कर महतो ने जयपाल सिंह मुंडा के जीवन और उपलब्धियों को रेखांकित किया:
- उनका जन्म 3 जनवरी 1903 को खूंटी जिले के टकरा गांव में हुआ।
- 1925 में उन्हें ऑक्सफोर्ड ब्लू का खिताब मिला।
- 1928 में भारतीय हॉकी टीम को ओलंपिक में पहला स्वर्ण पदक दिलाया।
- 1939 में झारखंड अलग राज्य आंदोलन की शुरुआत की।
- 1942 में कांग्रेस के रामगढ़ अधिवेशन में झारखंड राज्य का प्रस्ताव प्रस्तुत किया।
- संविधान सभा के सदस्य के रूप में आदिवासियों के अधिकारों की वकालत की।
- 1952 में सांसद रहे और 20 अगस्त 1970 को उनका निधन हो गया।
सरकार से जयंती को ‘झारखंड आंदोलनकारी दिवस’ घोषित करने की मांग
महतो ने सरकार से मांग की कि 3 जनवरी को जयपाल सिंह मुंडा की जयंती को ‘झारखंड आंदोलनकारी दिवस’ के रूप में घोषित किया जाए, जैसे 14 नवंबर को बाल दिवस मनाया जाता है।
उल्लेखनीय उपस्थिति और सांस्कृतिक कार्यक्रम
कार्यक्रम में कई झारखंड आंदोलनकारियों और नेताओं ने भाग लिया। सांस्कृतिक कार्यक्रम का नेतृत्व बलेश नायक और सिकंदर राम ने किया। इस समारोह ने न केवल जयपाल सिंह मुंडा के ऐतिहासिक योगदान को रेखांकित किया, बल्कि झारखंड आंदोलनकारियों के अधिकार और सम्मान की आवाज़ को भी बुलंद किया।
