Olympic में क्रिकेट की वापसी: 2028 में लॉस एंजेलेस में होगी शुरुआत.

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मुख्य बिंदु:

  1. क्रिकेट की ऐतिहासिक वापसी ओलंपिक में: क्रिकेट 2028 में ओलंपिक खेलों में 120 वर्षों के अंतराल के बाद अपनी ऐतिहासिक वापसी करेगा, जो कि एक महत्वपूर्ण मोड़ है।

  2. स्थान और प्रारूप: मैचों का आयोजन कैलिफोर्निया के पोमोना में होगा, और इसमें पुरुषों और महिलाओं के टी20 प्रारूप के मैच होंगे।

  3. विराट कोहली का वैश्विक प्रभाव: भारतीय क्रिकेट स्टार विराट कोहली को क्रिकेट के ओलंपिक में समावेशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए श्रेय दिया जाता है, क्योंकि उनकी वैश्विक लोकप्रियता और खेल में प्रभाव है।

  4. टी20 प्रारूप का महत्व: तेज़-तर्रार टी20 प्रारूप का चयन किया गया है, जो दर्शकों और प्रसारकों दोनों के लिए आकर्षक है, और इसे देखने का अनुभव रोमांचक होगा।

  5. क्रिकेट का वैश्विक विस्तार: ओलंपिक में क्रिकेट का समावेश खेल को वैश्विक स्तर पर नया विस्तार देगा, जिससे क्रिकेट को अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका जैसे नए क्षेत्रों में पहचान मिल सकती है।

  6. महिला क्रिकेट का उत्थान: महिला क्रिकेट का ओलंपिक पदार्पण महिला खिलाड़ियों के लिए एक बड़ा मंच प्रदान करेगा, जिससे इस खेल की दृश्यता और विकास को बढ़ावा मिलेगा।

  7. कुल मिलाकर क्र‍िकेट का भविष्य: ओलंपिक में क्रिकेट का समावेश न केवल खेल के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है, बल्कि इसका उद्देश्य आगामी दशकों में क्रिकेट को एक अधिक वैश्विक खेल बनाने का है।



क्रिकेट 2028 के ओलंपिक खेलों में ऐतिहासिक वापसी करने जा रहा है, जहां मुकाबले कैलिफोर्निया के पोमोना स्थित फेयरग्राउंड्स में खेले जाएंगे। यह ओलंपिक में क्रिकेट की एक सदी से भी अधिक समय बाद वापसी है। इस खबर से प्रशंसकों में जबरदस्त उत्साह है। कई लोग इस पुनरागमन का श्रेय भारतीय क्रिकेट स्टार विराट कोहली के वैश्विक प्रभाव को देते हैं। कोहली, जिन्हें अक्सर क्रिकेट का वैश्विक दूत माना जाता है, को इस खेल को ओलंपिक में शामिल करवाने में अहम भूमिका निभाने वाला माना जा रहा है। ओलंपिक क्रिकेट इवेंट में पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए टी20 प्रारूप शामिल होंगे, जो एक विशेष रूप से निर्मित स्टेडियम में ऊर्जावान मुकाबलों का वादा करता है।

ओलंपिक और क्रिकेट का पुराना नाता

ओलंपिक खेलों में क्रिकेट का इतिहास बहुत पुराना है, लेकिन काफी सीमित भी। क्रिकेट पहली और आखिरी बार 1900 के पेरिस ओलंपिक में खेला गया था। उस समय केवल दो टीमें—ग्रेट ब्रिटेन और फ्रांस—प्रतिस्पर्धा में शामिल थीं और मैच केवल एक ही खेला गया था। ग्रेट ब्रिटेन ने वह मुकाबला जीतकर इतिहास रच दिया, लेकिन इसके बाद क्रिकेट को ओलंपिक से हटा दिया गया।

20वीं शताब्दी में क्रिकेट का अंतरराष्ट्रीय स्वरूप और लोकप्रियता तेजी से बढ़ी, लेकिन ओलंपिक जैसे मंच पर इसकी गैरमौजूदगी हमेशा एक सवाल बनी रही। इसके पीछे कई कारण रहे, जैसे खेल की लंबी अवधि, सीमित भागीदारी, और आईसीसी व ओलंपिक समिति के बीच समन्वय की कमी।

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2028 लॉस एंजेलेस ओलंपिक में वापसी

अब, 128 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद क्रिकेट की ओलंपिक में धमाकेदार वापसी होने जा रही है। 2028 के लॉस एंजेलेस ओलंपिक में क्रिकेट को आधिकारिक तौर पर शामिल किया गया है, और इसके तहत पुरुषों व महिलाओं दोनों की T20 प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। ये मुकाबले अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित पोमोना शहर के फेयरग्राउंड्स में specially-designed स्टेडियम में खेले जाएंगे।

T20 फॉर्मेट के चयन से यह स्पष्ट है कि आयोजक तेज़, रोमांचक और दर्शकों को आकर्षित करने वाले प्रारूप को महत्व दे रहे हैं। इसका उद्देश्य क्रिकेट को उन क्षेत्रों में लोकप्रिय बनाना है जहां यह अभी भी नया है, जैसे अमेरिका, कनाडा, अफ्रीका के कुछ भाग और यूरोप।

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विराट कोहली का प्रभाव: ग्लोबल एंबेसडर की भूमिका

क्रिकेट की ओलंपिक में वापसी में भारतीय क्रिकेट स्टार विराट कोहली की भूमिका को भी अहम माना जा रहा है। कोहली सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि क्रिकेट के वैश्विक ब्रांड बन चुके हैं। उनके करोड़ों प्रशंसक पूरी दुनिया में हैं और वे सोशल मीडिया, इंटरव्यू और सार्वजनिक मंचों पर क्रिकेट की लोकप्रियता को बढ़ावा देते रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि कोहली जैसे खिलाड़ी, जिनका अंतरराष्ट्रीय कद बहुत ऊंचा है, ने क्रिकेट को ओलंपिक में शामिल कराने के प्रयासों को मजबूती दी है। भारत में क्रिकेट को धर्म की तरह माना जाता है, और विराट कोहली इसके सबसे चमकते सितारे हैं। उनकी लोकप्रियता और प्रभाव ने निश्चित ही ओलंपिक आयोजकों को यह समझाने में मदद की कि क्रिकेट को शामिल करने से वैश्विक दर्शक वर्ग में भारी इजाफा हो सकता है।

ICC और IOC का सहयोग

क्रिकेट को ओलंपिक में शामिल कराने के पीछे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) और अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) के बीच हुआ सहयोग भी एक बड़ी वजह रहा है। दोनों संस्थानों के बीच कई महीनों की बातचीत और योजना के बाद यह निर्णय लिया गया कि क्रिकेट, खासकर T20 फॉर्मेट, को 2028 ओलंपिक में शामिल किया जाएगा।

ICC पहले ही T20 लीग्स के माध्यम से दुनिया भर में क्रिकेट को लोकप्रिय बना चुका है। अमेरिका में मेजर लीग क्रिकेट (MLC) की शुरुआत ने वहां के बाजार को भी गर्म कर दिया है। इस पृष्ठभूमि में, ICC ने IOC को आश्वस्त किया कि क्रिकेट का टी20 प्रारूप ओलंपिक के लिए उपयुक्त है।

क्रिकेट के लिए नए अवसर

ओलंपिक में शामिल होने का मतलब है कि क्रिकेट को अब वैश्विक मंच पर मान्यता मिलेगी। इससे कई नए देश खेल में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित होंगे। ओलंपिक खेलों में भाग लेने वाले देशों को अपनी टीम तैयार करने के लिए सरकारी और निजी निवेश मिलेगा। इससे क्रिकेट की जड़ें अफ्रीका, अमेरिका, यूरोप और एशिया के उन देशों में भी गहरी होंगी जहां अभी तक यह केवल एक दर्शनीय खेल है।

महिला क्रिकेट को भी इससे बड़ा लाभ होगा। ओलंपिक में महिला T20 मुकाबले होने से महिला क्रिकेट को वैश्विक मंच मिलेगा और नई प्रतिभाएं उभर कर सामने आएंगी।

भारत की भूमिका

भारत इस फैसले से सबसे अधिक उत्साहित और लाभान्वित देशों में से एक है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने अब तक ओलंपिक में क्रिकेट को लेकर कुछ हिचकिचाहट दिखाई थी, लेकिन अब माहौल बदल रहा है। भारतीय फैंस के लिए यह गर्व की बात होगी कि उनका पसंदीदा खेल ओलंपिक जैसे प्रतिष्ठित मंच पर शामिल हो रहा है।

संभावना है कि 2028 में भारत T20 फॉर्मेट में गोल्ड मेडल का बड़ा दावेदार होगा, और विराट कोहली जैसे सितारे इस मुहिम के चेहरे हो सकते हैं।

निष्कर्ष: एक ऐतिहासिक कदम

क्रिकेट का ओलंपिक में लौटना सिर्फ एक खेल आयोजन नहीं, बल्कि खेल इतिहास में एक नई शुरुआत है। यह कदम खेल की सीमाओं को तोड़कर नए दर्शकवर्ग तक पहुंचने का प्रयास है। विराट कोहली जैसे खिलाड़ियों की लोकप्रियता, ICC और IOC का सहयोग और टी20 प्रारूप की गतिशीलता ने मिलकर यह संभव बनाया है।

अब 2028 का इंतजार है, जब लॉस एंजेलेस के स्टेडियम में क्रिकेट फिर से ओलंपिक की रौनक बढ़ाएगा।

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