पूर्वी क्षेत्रीय परिषद बैठक से पहले कांग्रेस का हमला–केंद्र ने झारखंड को किया नजरअंदाज़.

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झारखंड को चाहिए न्याय, अधिकार और हिस्सेदारी: कांग्रेस महासचिव आलोक कुमार दूबे का केंद्र से दो-टूक सवाल

मुख्य बिंदु:

  • पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक को झारखंड के लिए बताया गया अहम मौका

  • कांग्रेस नेता ने उठाए कोयला रॉयल्टी, केंद्र की योजनाओं और परिसंपत्ति विवाद पर सवाल

  • झारखंड की जनता को सिर्फ वादे नहीं, सम्मान और बराबरी चाहिए



बैठक से झारखंड को बड़ी उम्मीदें
पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति को लेकर झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के महासचिव आलोक कुमार दूबे ने कहा कि, यह झारखंड के लिए केवल एक प्रशासनिक बैठक नहीं, बल्कि अधिकारों और सम्मान की उम्मीद से भरा अवसर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य की जनता इस बैठक को औपचारिकता नहीं, बल्कि वर्षों से पनप रही उपेक्षा और अन्याय के खिलाफ न्याय की गुहार के रूप में देख रही है।

कोयले से जलता देश, लेकिन झारखंड को उसका हक नहीं
कांग्रेस नेता ने दो टूक शब्दों में कहा कि झारखंड केवल खनिज संपदा नहीं है, यह उन मेहनतकश लोगों की भूमि है जो देश की अर्थव्यवस्था को ऊर्जा देते हैं। उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि झारखंड के कोयले से जहां पूरे देश की बिजली जल रही है, वहीं उसी कोयले से जुड़ी हज़ारों करोड़ की रॉयल्टी आज भी केंद्र सरकार द्वारा रोकी गई है। यह आर्थिक अन्याय झारखंड के साथ एक ऐतिहासिक धोखा है, जिसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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योजनाओं में भेदभाव का आरोप
आलोक कुमार दूबे ने कहा कि केंद्र सरकार की योजनाएं आज भी कुछ गिने-चुने राज्यों तक ही सीमित लगती हैं। झारखंड के सैकड़ों गांव आज भी सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य सेवाएं और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। उन्होंने पूछा कि क्या केंद्र की योजनाएं केवल चुनावी राज्यों के लिए आरक्षित हैं? आदिवासी और पिछड़े इलाकों तक योजनाएं क्यों नहीं पहुँच पा रही हैं?

बिहार-झारखंड परिसंपत्ति विवाद अब तक अनसुलझा
उन्होंने एक और अहम मुद्दा उठाया – बिहार-झारखंड विभाजन के 25 साल बाद भी सैकड़ों परिसंपत्तियों का बंटवारा लंबित है। सरकारी भवन, पेंशन, वाहन, शिक्षण संस्थान जैसे मुद्दे अब भी हवा में लटके हुए हैं। आलोक दूबे ने कहा कि झारखंड की जनता बार-बार ‘नया राज्य’ कहकर टालने की राजनीति को समझ चुकी है और अब ठगे जाने को तैयार नहीं।

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अब वादे नहीं, बराबरी चाहिए
आखिर में आलोक कुमार दूबे ने स्पष्ट रूप से कहा कि झारखंड की जनता अब केवल वादों से नहीं बहलने वाली। उसे हक चाहिए, हिस्सेदारी चाहिए और केंद्र के साथ बराबरी का व्यवहार चाहिए। उन्होंने अमित शाह से अपील की कि वह झारखंड की आवाज को केवल सुनें नहीं, समझें और इस राज्य को उसका वाजिब अधिकार दिलाने के लिए ठोस कदम उठाएं। यह कोई राजनीतिक मांग नहीं, बल्कि करोड़ों झारखंडवासियों की भावनाओं की सच्ची अभिव्यक्ति है।

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