“जल-जंगल-जमीन की लड़ाई का प्रतीक: CM Hemant Soren ने सिदो-कान्हू को किया नमन”
मुख्य बातें
- CM Hemant Soren ने सिदो-कान्हू जयंती पर दी श्रद्धांजलि
- हूल विद्रोह को बताया संघर्ष और स्वाभिमान की मिसाल
- आदिवासी अधिकार और अस्मिता पर दिया जोर
- “सिदो-कान्हू का बलिदान सिर्फ इतिहास नहीं, प्रेरणा है”
सिदो-कान्हू जयंती पर CM हेमंत सोरेन का संदेश
झारखंड के मुख्यमंत्री Hemant Soren ने हूल विद्रोह के महानायक Sidho Murmu और Kanho Murmu की जयंती के अवसर पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।
उन्होंने अपने संदेश में कहा कि सिदो-कान्हू का संघर्ष केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के अधिकार, सम्मान और पहचान की लड़ाई का अमर प्रतीक है।
“अन्याय के खिलाफ बिगुल”: हूल विद्रोह की विरासत
मुख्यमंत्री ने कहा कि Santhal Rebellion के दौरान सिदो-कान्हू ने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए अंग्रेजों और शोषणकारी व्यवस्था के खिलाफ जो बिगुल फूंका, वह आज भी प्रेरणा देता है।
यह विद्रोह केवल एक आंदोलन नहीं था, बल्कि आदिवासी अस्मिता और स्वाभिमान की सबसे बड़ी लड़ाइयों में से एक था।
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आदिवासी अस्मिता और अधिकार का प्रतीक
CM सोरेन ने अपने संदेश में जोर देते हुए कहा कि सिदो-कान्हू का बलिदान आज भी हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है, जो अन्याय और शोषण के खिलाफ खड़ा होता है।
उन्होंने कहा कि झारखंड की पहचान और संस्कृति को समझने के लिए सिदो-कान्हू के योगदान को याद रखना बेहद जरूरी है।
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“अमर रहें वीर शहीद”
मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि
“अमर वीर शहीद सिदो-कान्हू अमर रहें, झारखंड के वीर शहीद अमर रहें।”
उनका यह संदेश सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग भी सिदो-कान्हू को श्रद्धांजलि देते हुए अपनी भावनाएं व्यक्त कर रहे हैं।
