हेमंत सोरेन सरकार 5 साल का श्वेत पत्र जारी करे: बाबूलाल मरांडी।

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सीएजी रिपोर्ट पर बाबूलाल मरांडी का बड़ा हमला

हेमंत सरकार के 5 साल लूट और भ्रष्टाचार के रहे: मरांडी

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने सीएजी रिपोर्ट का हवाला देते हुए झारखंड सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि हेमंत सरकार के पिछले पांच साल वित्तीय कुप्रबंधन, लूट और भ्रष्टाचार से भरे रहे। मरांडी ने राज्य सरकार से पिछले 5 वर्षों का श्वेत पत्र जारी करने की मांग की।

स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली उजागर

सीएजी रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड में चिकित्सा अधिकारियों और विशेषज्ञों के 3,634 स्वीकृत पदों में से 2,210 पद खाली पड़े हैं, जो कुल आवश्यकता का 61% है। रिपोर्ट में सरकारी अस्पतालों में स्टाफ नर्सों, पैरामेडिक्स और आवश्यक दवाओं की भारी कमी का खुलासा हुआ। 2020-21 और 2021-22 के बीच आवश्यक दवाओं की उपलब्धता 65% से 95% तक प्रभावित रही।

कोविड फंड के उपयोग में गड़बड़ी

मरांडी ने कहा कि सीएजी रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड सरकार को कोविड प्रबंधन के लिए 756.42 करोड़ रुपये उपलब्ध थे, लेकिन केवल 436.97 करोड़ (32%) राशि का ही उपयोग किया गया। गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने 754.61 करोड़ रुपये स्वीकृत किए, लेकिन इसमें से 539.56 करोड़ ही खर्च किए गए। इससे कोविड-19 प्रबंधन प्रभावित हुआ, प्रयोगशालाएं नहीं बनीं और मरीजों को गंभीर असुविधाएं झेलनी पड़ीं।

19125 करोड़ रुपये का कोई हिसाब नहीं

सीएजी रिपोर्ट में 19125.88 करोड़ रुपये की राशि के उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा न होने पर गंभीर आपत्ति जताई गई है। मरांडी ने कहा कि इस राशि के गबन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता और इसमें बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है।

मातृत्व लाभ योजना में घोटाला

रिपोर्ट के अनुसार, बोकारो और धनबाद में ऐसी अनियमितताएं पाई गईं, जहां चार महीने में ही महिला कर्मचारियों को दूसरा बच्चा हो गया और उन्हें दो बार मातृत्व लाभ योजना के तहत 1500-1500 रुपये दिए गए। यह वित्तीय अनियमितता का बड़ा उदाहरण है।

अबुआ स्वास्थ्य योजना पर उठाए सवाल

मरांडी ने झारखंड सरकार की अबुआ स्वास्थ्य योजना को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार ने सालाना 15 लाख रुपये स्वास्थ्य कवरेज देने की घोषणा तो कर दी, लेकिन इसे सीमित करने के लिए शहरी क्षेत्रों में 50 बेड और ग्रामीण क्षेत्रों में 30 बेड वाले अस्पतालों की शर्त लगा दी गई। इससे झारखंड के अधिकांश अस्पताल इस योजना से बाहर हो जाएंगे और केवल बड़े कॉर्पोरेट अस्पतालों को ही लाभ मिलेगा।

मरांडी ने सरकार पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह योजना सिर्फ दिखावे के लिए है, जबकि असल में इसका लाभ जरूरतमंदों को नहीं मिलेगा।

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