झारखंड के विश्वविद्यालयों में 11वीं-12वीं की पढ़ाई बंद, पेरेंट्स एसोसिएशन ने की हस्तक्षेप की मांग.

झारखंड/बिहार रोज़गार समाचार

झारखंड में कॉलेजों में +2 की पढ़ाई बंद करने का निर्णय | छात्रों और अभिभावकों में गहराया संकट, पेरेंट्स एसोसिएशन ने की हस्तक्षेप की मांग

🔹 मुख्य बिंदु 

  • विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों में 11वीं-12वीं की पढ़ाई बंद करने का आदेश

  • 10वीं पास नए छात्र और वर्तमान 11वीं में पढ़ रहे विद्यार्थी असमंजस में

  • झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन ने राज्य सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की

  • री-एडमिशन से बचाने और शिक्षा की निरंतरता बनाए रखने पर जोर

  • राज्य भर में +2 संस्थानों की संख्या के आधार पर निर्णय लेने की सलाह



विश्वविद्यालयों और कॉलेजों से हटेगी +2 की पढ़ाई

राज्यपाल एवं केंद्र सरकार के निर्देश पर झारखंड सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब राज्य के विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों में 11वीं व 12वीं कक्षा की पढ़ाई नहीं होगी। यह आदेश आगामी शैक्षणिक सत्र से प्रभावी माना जा रहा है।

इस निर्णय से एक तरफ जहां इस वर्ष 10वीं पास करने वाले छात्रों को अपने भविष्य को लेकर चिंता सताने लगी है, वहीं दूसरी ओर पहले से कॉलेजों में 11वीं में नामांकित विद्यार्थियों को भी भारी असमंजस का सामना करना पड़ रहा है।

अभिभावकों में गहरी चिंता, छात्रों का भविष्य अधर में

अभिभावकों के बीच इस फैसले को लेकर व्यापक असंतोष देखा जा रहा है। उन्हें डर है कि उनके बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो जाए या उन्हें दोबारा प्रवेश की जटिल प्रक्रिया से न गुजरना पड़े। विशेष चिंता इस बात की है कि छात्रों को नए संस्थानों में स्थानांतरित किया जाएगा या नहीं, और यदि हां, तो प्रक्रिया कैसी होगी।

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झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन की राज्य सरकार से अपील

झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय राय ने इस विषय पर राज्य सरकार से तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है। उन्होंने रामदास सोरेन से अनुरोध किया कि छात्रों की शिक्षा की निरंतरता बनाए रखने के लिए त्वरित और प्रभावी दिशानिर्देश जारी किए जाएं।

उनका कहना है कि छात्रों को री-एडमिशन या री-रजिस्ट्रेशन जैसी जटिल प्रक्रिया से गुजरने की आवश्यकता न हो। साथ ही सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इस साल मैट्रिक पास करने वाले छात्रों को इंटरमीडिएट संस्थानों में नामांकन में कोई दिक्कत न हो।

निर्णय से पहले इंटर कॉलेजों की उपलब्धता का मूल्यांकन जरूरी

पेरेंट्स एसोसिएशन ने यह भी सुझाव दिया है कि राज्य सरकार को राज्यभर में उपलब्ध इंटर (+2) संस्थानों की संख्या, सीटों और संसाधनों का मूल्यांकन करने के बाद ही किसी तरह का व्यापक निर्णय लेना चाहिए। ऐसा न हो कि शिक्षण संस्थानों की कमी के कारण हजारों छात्रों का भविष्य दांव पर लग जाए।

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शिक्षा की निरंतरता के लिए प्रक्रिया को बनाएं पारदर्शी व सरल

झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन का आग्रह है कि सरकार छात्रों और अभिभावकों की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए पूरी प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और सुगम बनाए। साथ ही यह भी आवश्यक है कि संक्रमण काल में छात्रों को मानसिक तनाव से बचाने के लिए सरकार तत्काल सूचना व मार्गदर्शन अभियान चलाए।

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