मुख्यमंत्री मंईया सम्मान योजना: आजीविका सशक्तिकरण की दिशा में आगे बढ़ रही हैं झारखंड की ग्रामीण महिलाएं
आर्थिक सहायता से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ा एक प्रेरक मॉडल, 32 लाख से अधिक महिलाएं सखी मंडलों से जुड़ीं
मुख्य बिंदु:
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मुख्यमंत्री मंईया सम्मान योजना अब सिर्फ आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि आजीविका संवर्धन का माध्यम
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झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) की मदद से महिलाएं बन रहीं हैं आत्मनिर्भर
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32 लाख से अधिक ग्रामीण महिलाएं सखी मंडलों के माध्यम से जुड़ीं
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स्वरोजगार, क्रेडिट लिंकेज और प्रशिक्षण से महिलाएं आर्थिक रूप से हो रहीं मजबूत
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ग्रामीण विकास विभाग के नेतृत्व में सशक्तिकरण की व्यापक योजना लागू
योजना से आर्थिक सहयोग नहीं, अब आजीविका संवर्धन भी
रांची, 14 जुलाई 2025- मुख्यमंत्री मंईया सम्मान योजना, जिसे झारखंड सरकार ने वर्ष 2024 में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में शुरू किया था, अब राज्य की ग्रामीण महिलाओं के जीवन में व्यापक परिवर्तन ला रही है। यह योजना अब केवल ₹2500 की मासिक आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह महिलाओं को स्वरोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रेरित कर रही है।
JSLPS की पहल से सशक्तिकरण को मिला आधार
झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) द्वारा राज्यभर में संचालित सखी मंडलों के माध्यम से महिलाओं को योजना की राशि को आयवर्धन गतिविधियों से जोड़ने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य महिलाओं को केवल लाभार्थी बनाए रखना नहीं, बल्कि उन्हें स्थायी उद्यमिता की ओर अग्रसर करना है।
मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना: रांची की 3.25 लाख महिलाओं को ₹2500 की राशि जारी.
32 लाख से अधिक महिलाएं सखी मंडलों से जुड़ीं
राज्य के सभी जिलों में अब तक 32 लाख से अधिक महिलाएं सखी मंडलों का हिस्सा बन चुकी हैं। इनमें से अधिकांश महिलाएं मुख्यमंत्री मंईया सम्मान योजना की लाभुक भी हैं। अब ये महिलाएं योजना की राशि का उपयोग दुकान, पशुपालन, बागवानी, सिलाई-कढ़ाई, कुटीर उद्योग जैसी गतिविधियों में कर रही हैं।
प्रशिक्षण और बैंक लिंकेज से मिल रही मजबूती
ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडे सिंह के नेतृत्व में JSLPS राज्य के सभी जिलों में महिलाओं को उद्यमिता प्रशिक्षण, क्रेडिट लिंकेज, समूह ऋण, एवं विपणन सहायता जैसे संसाधन उपलब्ध करा रहा है। इसका उद्देश्य है कि योजना की राशि लघु और सूक्ष्म व्यवसायों में निवेश होकर सतत आजीविका का आधार बने।
एक महिला, एक उद्यमी की ओर झारखंड
यह पहल महिलाओं के सशक्तिकरण की एक स्थायी एवं प्रभावशाली दिशा प्रस्तुत करती है, जहां सहायता राशि को सिर्फ उपभोग नहीं, बल्कि निवेश के रूप में देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की इस योजना ने यह स्पष्ट किया है कि झारखंड की महिला शक्ति केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि अब निर्णयकर्ता और निर्माता की भूमिका में आ रही हैं।
योजना का उद्देश्य
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महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना
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सहायता राशि से स्वरोजगार को प्रोत्साहन
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गांवों में महिला नेतृत्व को मजबूती
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लघु व्यवसायों की वृद्धि
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महिलाओं को वित्तीय संस्थाओं से जोड़ना
