बाबा तिलका मांझी के शहादत दिवस पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का नमन, स्वतंत्रता संग्राम के महानायक को किया याद
रांची।
ब्रिटिश शासन के खिलाफ स्वतंत्रता संग्राम का बिगुल फूंकने वाले संथाल विद्रोह के महानायक, अमर वीर शहीद बाबा तिलका मांझी के शहादत दिवस पर राज्यभर में उन्हें श्रद्धापूर्वक याद किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बाबा तिलका मांझी को कोटि-कोटि नमन करते हुए उनके बलिदान को देश के स्वतंत्रता संग्राम का प्रेरणास्रोत बताया।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि बाबा तिलका मांझी देश की आज़ादी और संथाल विद्रोह के ऐसे महानायक थे, जिन्होंने अन्याय और शोषण के खिलाफ साहस, स्वाभिमान और आत्मसम्मान के साथ संघर्ष किया। उनका जीवन आज भी हमें न्याय, समानता और अधिकारों के लिए डटकर खड़े रहने की प्रेरणा देता है।
1778 में आदिवासी विद्रोह का किया नेतृत्व
बाबा तिलका मांझी को देश के पहले स्वतंत्रता सेनानियों में गिना जाता है। सन् 1778 में उन्होंने आदिवासी समाज को संगठित कर ब्रिटिश शासन के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह किया था। उन्होंने रामगढ़ कैंप से अंग्रेजों को खदेड़ने का साहसिक कार्य किया, जिससे अंग्रेजी हुकूमत की नींव हिल गई थी।
अन्याय के खिलाफ संघर्ष की अमर मिसाल
बाबा तिलका मांझी का संघर्ष केवल सत्ता के खिलाफ नहीं था, बल्कि यह जल, जंगल और जमीन की रक्षा, आदिवासी स्वाभिमान और सामाजिक न्याय की लड़ाई थी। उनका बलिदान आज भी झारखंड सहित पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
आज भी प्रासंगिक है बाबा तिलका मांझी का विचार
मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा तिलका मांझी के विचार और संघर्ष आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। उनके बताए मार्ग पर चलकर ही समाज में समानता, न्याय और आत्मसम्मान को मजबूत किया जा सकता है। शहादत दिवस के अवसर पर राज्यभर में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित कर वीर शहीद को नमन किया गया।
